सनातन परंपरा में संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए सकट चौथ व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है, जिसे तिलवा चौथ, तिल-कुटा चौथ, माघी चौथ और वक्र-तुंड चतुर्थी जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं सकट माता, भगवान गणेश और चंद्र देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत रखती हैं और संतान की मंगल कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सकट चौथ का व्रत अत्यंत पुण्यदायी होता है और इससे जीवन में समृद्धि, सुख और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हिंदू धर्म में सकट चौथ का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाले संकटों के निवारण के लिए रखा जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत को भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित माना जाता है।
सकट चौथ
सकट चौथ हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला व्रत है, जिसे संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन से संकटों के निवारण के लिए रखा जाता है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है और भगवान गणेश व सकट माता की पूजा का विधान होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर संतान की मंगल कामना करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि सकट चौथ का विधिपूर्वक पालन करने से परिवार में खुशहाली आती है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
महत्व
सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश और सकट माता की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। महिलाएं विशेष रूप से बच्चों की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं, तिल-कुटा का भोग लगाती हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। सकट चौथ को तिल-कुटा चौथ भी कहा जाता है, क्योंकि पूजा में तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन तिल का पहाड़ बनाकर, चांदी के सिक्के से उसे बीच से काटने की परंपरा है, जिसे जीवन की बाधाओं के नाश और संतान के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
सकट चौथ 2026 इस वर्ष माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि के अनुसार मनाई जाएगी, जो 6 जनवरी 2026 को सुबह 8:01 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। चूंकि चंद्रोदय 6 जनवरी को चतुर्थी तिथि में ही होगा और 7 जनवरी को पंचमी तिथि लग जाएगी, इसलिए सकट चौथ का व्रत मंगलवार, 6 जनवरी को ही रखा जाएगा।
पूजा विधि
- धर्मशास्त्रों के अनुसार सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिसे सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है।
- इस दिन भक्त सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।
- कई लोग निर्जला उपवास रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
- दिन भर भगवान गणेश का स्मरण और ध्यान किया जाता है।
- शाम के समय विधि-विधान से पूजा कर चंद्र दर्शन किया जाता है और दूध व जल से अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
- यदि निर्जला व्रत कठिन लगे तो फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है, लेकिन नमक से परहेज करना चाहिए।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
