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इंदौर के बाद भोपाल पर भी संकट, नलों तक पहुंच रहा सीवेज; हजारों लोग पी रहे गंदा पानी

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Published On: 6 January 2026

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इसी बीच भोपाल में भी हालात डराने वाले सामने आ रहे हैं। नगर निगम की जांच में यह खुलासा हुआ है कि शहर की कई पानी की लाइनों में सीवेज का पानी मिल रहा है। हालात को भांपते हुए निगम ने आनन-फानन में वाल्व सुधारने और लीकेज बंद करने का काम शुरू किया है, ताकि इंदौर जैसी भयावह स्थिति भोपाल में न बने।

एक ओर निगम सुधार के दावे कर रहा है, तो दूसरी ओर खानूगांव क्षेत्र में हालात जस के तस बने हुए हैं। यहां करीब दो हजार लोग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्थानीय पार्षद रेहाना सुल्तान ने खुद कुएं में सीवेज का पानी गिरने का वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है।

भोपाल 15 दिन की शिकायत

पार्षद प्रतिनिधि मो. जहीर का कहना है कि खानूगांव में कई दिनों से सीवेज का पानी सीधे कुएं में जा रहा है। इसी कुएं से क्षेत्र के लगभग 2000 लोगों को पानी सप्लाई किया जाता है। इस गंभीर समस्या की लिखित शिकायत 15 दिन पहले संबंधित अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब जिम्मेदार अधिकारी फोन कॉल तक रिसीव नहीं कर रहे। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो दूषित पानी से कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसी के चलते जल्द प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।

भोपाल के 22 वार्ड बने डेंजर जोन

जांच में सामने आया है कि भोपाल के करीब 22 वार्ड ऐसे हैं, जहां पानी की पाइप लाइन और सीवेज लाइन एक साथ बिछी हुई हैं। लगभग 400 किलोमीटर लंबी यह लाइनें पूरी तरह पुरानी हो चुकी हैं। नवीबाग और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र सहित इन इलाकों में करीब 5 लाख की आबादी रहती है, जो सीधे खतरे की जद में है। बताया जा रहा है कि शहर में बिछी अधिकतर पाइप लाइनें लोहे की हैं और अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। इसी कारण इनमें सबसे ज्यादा लीकेज हो रहे हैं। नगर निगम के मुताबिक, इन्हें बदलने के लिए करीब 500 करोड़ रुपए की जरूरत है। 2.71 लाख नल कनेक्शन में से लगभग 75 हजार कनेक्शन ऐसे हैं, जिनकी लाइन बदलना जरूरी हो चुका है।

5 जोन में सबसे ज्यादा परेशानी

भोपाल के जोन-3, 4, 5, 16 और 17 के कई इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बाबू जगजीवन राम नगर, नारियल खेड़ा, जेपी नगर, शाहजहांनाबाद, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, करोंद, नवीबाग जैसे इलाकों में बार-बार लीकेज की शिकायतें सामने आ रही हैं। देवकी नगर, अंबेडकर नगर और चौकसे नगर भी संवेदनशील सूची में शामिल हैं। नगर निगम का दावा है कि अब तक एक हजार से ज्यादा पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं और कोई भी फेल नहीं हुआ। हालांकि पुराने भोपाल के इलाकों में जगह की कमी के कारण सीवेज और पानी की लाइनें पास-पास हैं, जिससे लोगों का भरोसा डगमगाया हुआ है।

भविष्य की जरूरतें

भोपाल में फिलहाल हर दिन करीब 450 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई हो रही है। वर्ष 2040 तक यह जरूरत 514 मिलियन लीटर प्रतिदिन पहुंचने का अनुमान है। इसके लिए अमृत-2 योजना के तहत 750 किलोमीटर नई पाइप लाइन बिछाई जा रही है। निगम का दावा है कि आने वाले वर्षों में 3.10 लाख कनेक्शन के जरिए शहर की जरूरत पूरी की जाएगी, लेकिन तब तक दूषित पानी का खतरा सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।’

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