,

भोपाल में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर 2000 अभ्यर्थियों का जोरदार आंदोलन, दिखा आक्रोश

Author Picture
Published On: 6 January 2026

भोपाल में मंगलवार को मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और भर्ती प्रक्रिया में कम पद घोषित करने के खिलाफ प्रदेशभर से करीब 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे। यह छात्र और अभ्यर्थी लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि स्कूलों में हजारों पद रिक्त हैं, लेकिन वर्तमान भर्ती में केवल गिने-चुने पद ही घोषित किए जा रहे हैं। इससे योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल रहा और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

भोपाल भर्ती प्रक्रिया में कम पद

मध्यप्रदेश शासन के अनुसार 27 दिसंबर 2024 तक माध्यमिक शिक्षकों के करीब 99,197 और प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 1,31,152 पद रिक्त हैं। लेकिन वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में केवल माध्यमिक शिक्षक के 10,800 और प्राथमिक शिक्षक के 13,089 पदों पर ही नियुक्ति की जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह वास्तविक जरूरत के मुकाबले बहुत कम है। अभ्यर्थियों ने जनजातीय कार्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई विषयों में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए शून्य पद दर्शाए गए हैं। इससे इन वर्गों के युवाओं में निराशा बढ़ी है और आरक्षण प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

छात्रों की पढ़ाई प्रभावित

शिक्षक संगठनों का कहना है कि पदों की कमी का सबसे बड़ा असर छात्रों पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि परीक्षा परिणाम भी खराब हो रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात सुधारने पर जोर है, लेकिन पर्याप्त नियुक्तियों के बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।

अभ्यर्थियों ने सरकार से कई मांगें रखीं। इनमें माध्यमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग-2) के सभी विषयों में कम से कम 3-3 हजार पदों की वृद्धि, प्राथमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग-3) में पदों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करना, और द्वितीय काउंसिलिंग जल्द शुरू करने की मांग शामिल है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती 2025 पद वृद्धि के साथ पूरी नहीं होगी, तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए। प्रदर्शनकारी चेतावनी दे चुके हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे चरण में बढ़ सकता है।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp