अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसे भारत के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। इन संगठनों में भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भी शामिल है, जिसे भारत की अहम जलवायु कूटनीतिक पहल माना जाता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इन संस्थाओं को अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताते हुए इनमें भागीदारी और वित्तपोषण समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बाहर निकालने का आदेश दिया है, जिनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकाय और 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये संस्थाएं अमेरिकी हितों, संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा के अनुरूप काम नहीं कर रही थीं, इसलिए यह फैसला लिया गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने तोड़ा नाता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक फैसले के तहत अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संधियों से बाहर निकालने का आदेश दिया है, जिसे भारत के लिए बुरी खबर माना जा रहा है। इन संगठनों में 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकाय और 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संस्थाएं शामिल हैं। इस फैसले का असर भारत की कई बहुपक्षीय पहलों पर पड़ सकता है, खासतौर पर भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसी संस्थाओं पर, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ये संगठन अमेरिकी हितों, संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा के खिलाफ काम कर रहे थे, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक सहयोग और जलवायु कूटनीति को बड़ा झटका लग सकता है।
भारत को लगा कूटनीतिक झटका
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भारत की वैश्विक नेतृत्व छवि का एक अहम आधार रहा है, ऐसे में अमेरिका जैसे बड़े अर्थतंत्र का इससे अलग होना भारत के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। इससे न केवल मंच की राजनीतिक ताकत कमजोर पड़ सकती है, बल्कि सौर परियोजनाओं के लिए बहुपक्षीय वित्त और निजी निवेश पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक सहमति बनाने के लिए भारत को अब अतिरिक्त कूटनीतिक प्रयास करने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ISA के 100 से अधिक देश सदस्य हों और भारत-फ्रांस का नेतृत्व बना रहे, लेकिन अमेरिका का बाहर जाना वैश्विक स्तर पर नकारात्मक संदेश देता है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा पर बहुपक्षीय सहयोग की गति धीमी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से फंडिंग खत्म
व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका इन अंतरराष्ट्रीय संगठनों को दिया जाने वाला वित्तपोषण और उनमें भागीदारी “यथाशीघ्र” खत्म करेगा, जिसके लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संघीय विभागों और एजेंसियों को तुरंत आदेश लागू करने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब उन संस्थाओं को न तो धन देगा और न ही उनमें सक्रिय रूप से शामिल होगा, जो उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं हैं। वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन संगठनों को अनावश्यक, कुप्रबंधित, अपव्ययी और वैचारिक एजेंडे से प्रेरित बताते हुए अमेरिकी नीति में इस बड़े बदलाव का बचाव किया।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खींचा हाथ
अमेरिकी नेता मार्को रुबियो के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय संगठन डीईआई, लैंगिक समानता अभियानों और जलवायु एजेंडों की आड़ में अमेरिका की संप्रभुता को सीमित करने की कोशिश करते हैं, इसलिए अब करदाताओं के अरबों डॉलर ऐसे संगठनों पर खर्च नहीं किए जाएंगे। इसी नीति के तहत अमेरिका जिन प्रमुख संस्थाओं से बाहर निकल रहा है, उनमें अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, यूएन महिला, यूएन जनसंख्या कोष, यूएन जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन, शांति निर्माण आयोग और यूएन व्यापार एवं विकास सम्मेलन शामिल हैं।
