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महाकाल ट्रैवल्स की महातीर्थ यात्रा, 15 दिन में 8 ज्योतिर्लिंग; भारत-नेपाल के पावन धामों का संगम

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Published On: 8 January 2026

धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देते हुए महाकाल ट्रैवल्स ने एक विशेष तीर्थ यात्रा की घोषणा की है, जिसमें श्रद्धालुओं को भारत और नेपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। यह यात्रा केवल भ्रमण नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक विस्तृत अवसर मानी जा रही है। यात्रा की शुरुआत 20 जनवरी 2026 से भोपाल के लालघाटी चौराहा से होगी।

करीब 15 से 18 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु नॉन-एसी स्लीपर बस के माध्यम से सफर करेंगे। पूरे कार्यक्रम का संचालन अनुभवी समिति और व्यवस्थापकों द्वारा किया जाएगा, जिससे यात्रियों को मार्गदर्शन, अनुशासन और सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। यात्रा मध्य प्रदेश से शुरू होकर उत्तर भारत, पूर्वी भारत, महाराष्ट्र और नेपाल तक पहुंचेगी।

महाकाल ट्रैवल्स की महातीर्थ यात्रा

इस महायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता 8 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के दर्शन हैं। इनमें काशी विश्वनाथ, पशुपतिनाथ, बाबा बैजनाथ, भीमाशंकर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, ओंकारेश्वर और उज्जैन के महाकालेश्वर शामिल हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह एक दुर्लभ अवसर होगा, जब वे एक ही यात्रा में इतने पवित्र धामों के दर्शन कर सकेंगे। यात्रा के शुरुआती चरण में छतरपुर का बागेश्वर धाम, खजुराहो, मैहर की शारदा माता और चित्रकूट के प्रमुख आश्रम व तीर्थ स्थल शामिल हैं। इसके बाद प्रयागराज में संगम स्नान, वाराणसी में गंगा स्नान और अयोध्या में राम जन्मभूमि सहित अनेक धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे।

नेपाल और पूर्वी भारत की धार्मिक धरोहर

भारत-नेपाल सीमा पार कर श्रद्धालु काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर, जनकपुरी और सीतामढ़ी पहुंचेंगे। इसके बाद गया जी में पितृ तर्पण, देवघर में बाबा बैजनाथ, कोलकाता में काली देवी और ओडिशा के जगन्नाथ पुरी धाम के दर्शन यात्रा का हिस्सा होंगे।

महाराष्ट्र में शिरडी साईं धाम, शनि शिंगणापुर, अजंता-एलोरा और नाशिक की पंचवटी के दर्शन के बाद यात्रा मध्य प्रदेश लौटेगी। ओंकारेश्वर, उज्जैन महाकाल, देवास की चामुंडा टेकरी और कुबेरेश्वर धाम के दर्शन के साथ यात्रा का समापन भोपाल में होगा।

शुल्क

प्रति व्यक्ति ₹20,501 शुल्क में सुबह की चाय, नाश्ता और रात्रि भोजन की व्यवस्था शामिल है। यात्रियों को व्यक्तिगत सामान स्वयं लाना होगा और बस से उतरने के बाद के खर्च स्वयं वहन करने होंगे। यह यात्रा आस्था के साथ अनुशासन और सामूहिक अनुभव का संदेश देती है।

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