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भागीरथपुरा में जहर बना पानी, 20 मौतों के बाद भी डर के साये में ज़िंदगी

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Published On: 8 January 2026

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी अब लोगों की प्यास नहीं, बल्कि जान के लिए खतरा बन गया है। जांच में सामने आया है कि यहां बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मौजूद है, जो हैजा, टाइफॉइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए 60 सैंपलों में से 35 पूरी तरह फेल पाए गए हैं, जिससे इलाके में दहशत और बढ़ गई है।

हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वार्ड के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला के घर की बोरिंग भी दूषित पाई गई है। इससे साफ है कि समस्या किसी एक गली या मोहल्ले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैली हुई है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधियों के घर सुरक्षित नहीं, तो आम जनता कैसे बचेगी।

भागीरथपुरा में जहर बना पानी

भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 437 लोग अब तक अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। बुधवार रात तक 381 मरीजों को छुट्टी दे दी गई, लेकिन अभी भी 56 मरीज इलाजरत हैं। इनमें से 9 की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में भर्ती हैं। बुधवार को भागीरथपुरा चौकी के पास बनी पानी की टंकी का वॉल खोला गया तो चौंकाने वाला नजारा सामने आया। जिस जगह दो दिन पहले ड्रेनेज लाइन का पाइप डाला गया था, वहीं से पानी बहने लगा। कुछ ही देर में ड्रेनेज के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी भर गया, जिससे साफ हो गया कि सीवेज और पेयजल लाइन के आपसी संपर्क ने हालात बिगाड़े हैं।

नर्मदा पानी पर भी रोक

प्रशासन ने पहले ही नर्मदा लाइन से आने वाले पानी के उपयोग को लेकर इलाके में मुनादी करवा दी थी। लोगों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि फिलहाल इस पानी का इस्तेमाल न करें। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया कुछ समय तक जारी रहेगी, ताकि पाइपलाइन में मौजूद दूषित पानी पूरी तरह बाहर निकाला जा सके। इलाके में दूषित पानी का खौफ इतना गहरा है कि लोग पानी को छानकर और उबालकर पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य अमला लगातार लोगों को समझाइश दे रहा है कि बिना उबाले पानी का सेवन न करें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

टैंकर और आरओ बने सहारा

लगातार हो रही मौतों के बाद लोगों ने बोरिंग का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया है। अब रहवासी टैंकरों और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 18 लोग डायरिया की शिकायत लेकर पहुंचे, जिनमें से 6 की हालत देखते हुए उन्हें रेफर किया गया। भागीरथपुरा में हालात अभी भी सामान्य होने से दूर हैं।

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