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भोपाल के खानूगांव, आदमपुर और वाजपेयी नगर में ग्राउंड वाटर दूषित; ई-कोलाई से बढ़ी चिंता

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Published On: 8 January 2026

भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर क्षेत्रों के ग्राउंड वाटर के सैंपल की जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। जांच में लिए गए चार सैंपल फेल हुए हैं। यह वही बैक्टीरिया है, जो हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था और जिसके कारण 20 लोग मौत के मुहाने तक पहुँच गए थे। भोपाल नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में पाइपलाइन के जरिए सप्लाई नहीं होती, इसलिए यह ग्राउंड वाटर है। इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। बावजूद इसके, खानूगांव में लगभग 2 हजार लोग अभी भी दूषित पानी पी रहे हैं।

दो दिन पहले विधायक आतिफ अकील और पार्षद प्रतिनिधि मो. जहीर खानूगांव पहुंचे थे। जहीर ने खुद कुएं में सीवेज जाते हुए वीडियो बनाया और शिकायत की। विधायक अकील ने नगर निगम के इंजीनियरों को कड़ी फटकार लगाई थी। जहीर ने बताया कि क्षेत्र में कई दिनों से सीवेज का पानी कुएं में जा रहा है और वहां से लगभग 2 हजार लोगों को पानी दिया जा रहा है।

भोपाल नगर निगम के अफसरों का बयान

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव में लोग भूजल आधारित स्रोतों का पानी न पिएं। बुधवार को कुल 250 पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें से चार में बैक्टीरिया मिला। इसमें दो सैंपल आदमपुर खंती के पास, एक वाजपेयी नगर के पास और एक खानूगांव कुएं से था। आदमपुर में कचरा खंती के आसपास के पांच गांवों में 4 हजार से अधिक लोग दूषित हवा और पानी से जूझ रहे हैं। 800 मीटर के दायरे में पानी और हवा दूषित हो चुकी है। खेतों की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी घट गई है। पर्यावरणविदों ने इस मुद्दे पर पहले भी एनजीटी में याचिका दायर की है।

लीकेज की समस्या

भोपाल के करीब 22 वार्डों में 400 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन सीवेज के साथ बिछी हुई है। इनमें नवीबाग और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र जैसे बड़े इलाके शामिल हैं। 2.71 लाख नल कनेक्शन में से 75 हजार की लाइन बदलने की जरूरत है। अमृत-2 योजना के तहत शहर में 750 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है। शहर में वर्तमान में हर दिन 450 मिलियन लीटर पानी सप्लाई होता है। 2040 तक पीने के पानी की जरूरत 514 मिलियन लीटर प्रति दिन होगी। नेटवर्क विस्तार और पाइपलाइन सुधार के लिए तीन साल में 448 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। 85% वैध कॉलोनियों में पानी की सप्लाई होती है, अवैध कॉलोनियों में अभी नहीं।

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