ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने लड़कियों की वेश्यावृत्ति से जुड़े मामले में ग्वालियर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अरविंद सक्सेना को तलब किया है। यह कार्रवाई पायल नामक याचिकाकर्ता द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिवपुरी जिले में मीना और अन्य लोगों ने कई लड़कियों को बंधक बनाकर वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया है, जबकि प्रशासन और पुलिस इस गंभीर मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही।
राज्य शासन ने अदालत को जवाब देते हुए याचिका को पारिवारिक विवाद बता दिया था। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि यह केवल पारिवारिक झगड़ा नहीं है, बल्कि समाज के लिए गंभीर और संवेदनशील मामला है। अदालत ने आईजी के साथ-साथ शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक को भी तलब किया और कहा कि मामले में सोचा-समझा और जिम्मेदार रुख अपनाया जाए।
ग्वालियर हाईकोर्ट
कोर्ट ने आईजी से कहा कि वे इस मामले को लेकर अपनी सोच बदलें और गंभीरता से देखें। युगल पीठ ने निर्देश दिया कि पिछले 11 सालों में शिवपुरी जिले में कितनी लड़कियां गायब हुई हैं और उनमें से कितनी बरामद की गई हैं, इसका पूरा रिकॉर्ड पेश किया जाए। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि संबंधित अधिकारियों की कार्यवाही और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।
कोर्ट ने सिंगल बेंच द्वारा दर्ज आंकड़ों और रिकॉर्ड को ध्यान से देखने का निर्देश दिया। यह जांच लड़कियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में अहम साबित होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन और पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो इसके लिए कानूनी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
आगामी कार्रवाई
ग्वालियर हाईकोर्ट का रुख साफ है कि लड़कियों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने आईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मामले की पूरी जानकारी और वर्तमान स्थिति के साथ रिपोर्ट पेश करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अब तक हुई कार्रवाई पर्याप्त और प्रभावी हो। पायल की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश बोहरे ने कोर्ट में बताया कि यह मामला सिर्फ याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि लड़कियों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय का सवाल है। अब कोर्ट द्वारा आईजी और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट तलब करने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की राह साफ हो गई है।
