सतना शहर की हनुमान नगर नई बस्ती, वार्ड नंबर 15 में बीती रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पानी टंकी के पीछे पुलिस टीम पर अचानक हमला कर दिया गया। रात का सन्नाटा चीरते हुए पत्थरों की बारिश शुरू हो गई और हालात ऐसे बने कि पुलिसकर्मियों को जान बचाकर पीछे हटना पड़ा। घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में कुछ असामाजिक तत्व पहले से मौजूद थे। जैसे ही पुलिस टीम वहां पहुंची, उन पर चारों ओर से पथराव शुरू कर दिया गया। पत्थर इतनी तेजी से फेंके गए कि पुलिस को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अचानक हुए इस हमले ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमले की तीव्रता को देखते हुए पुलिसकर्मियों को मौके से पीछे हटना पड़ा। बताया जा रहा है कि हालात इतने बिगड़ गए थे कि यदि पुलिस वहीं रुकती, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता था। गनीमत रही कि इस घटना में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ, लेकिन खतरा बेहद करीब था।
सतना में खाकी पर पथराव
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या शहर में पुलिस का खौफ खत्म होता जा रहा है। खुलेआम पुलिस पर हमला होना इस बात का संकेत है कि असामाजिक तत्वों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं। जिस खाकी को कानून का प्रतीक माना जाता है, उसी पर पत्थर बरसाना बेहद गंभीर मामला है। जब पुलिस खुद सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरी हो जाती है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यदि अपराधी पुलिस पर ही इस तरह हावी हो सकते हैं, तो आम आदमी खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा। घटना के बाद इलाके के लोग भय और असमंजस में हैं।
प्रशासनिक सख्ती की उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे तत्वों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो उनका मनोबल और बढ़ेगा। पुलिस प्रशासन की ओर से भी मामले की जांच और दोषियों की पहचान की बात कही जा रही है। नई बस्ती की यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते हालात को नहीं संभाला गया, तो ऐसे मामले आगे और बढ़ सकते हैं। अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और शहर में भरोसे का माहौल कैसे बहाल किया जाता है।
