इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी के बाद हालात अब कुछ हद तक संभलते नजर आ रहे हैं। लगातार हो रही मौतों और बड़ी संख्या में बीमारों के बीच राहत की बात यह है कि नए मरीजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को ओपीडी में डायरिया के 15 नए मरीज पहुंचे, जिनमें से केवल दो को ही भर्ती करने की जरूरत पड़ी। इससे पहले जिस तेजी से मरीज बढ़ रहे थे, उसकी तुलना में यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के लिए सुकून देने वाला है।
अब तक इस प्रकरण में कुल 414 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया था। इनमें से 369 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद घर लौट चुके हैं। फिलहाल अलग-अलग अस्पतालों में 45 मरीजों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकतर मरीजों की हालत स्थिर है, जिससे अस्पतालों पर बना अतिरिक्त दबाव भी धीरे-धीरे कम हो रहा है।
भागीरथपुरा की त्रासदी
हालांकि राहत के बीच चिंता की वजह भी बनी हुई है। भर्ती मरीजों में से 11 आईसीयू में हैं और चार मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर जीवन से जूझ रहे हैं। इन मरीजों में किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं, साथ ही मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी जटिलताएं भी हैं। बताया जा रहा है कि वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों में अधिकांश बुजुर्ग हैं और कुछ पहले से अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी निगरानी कर रही है।
उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंथन
शुक्रवार देर शाम इस पूरे मामले को लेकर उच्च स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, इंदौर जिले के प्रभारी अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कमिश्नर, कलेक्टर और नगर निगम के शीर्ष अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। भागीरथपुरा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं और जल आपूर्ति व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के बाद अधिकारियों ने ऐलान किया कि 10 जनवरी से पूरे प्रदेश में शुद्ध जल अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत सभी जल स्रोतों की जांच, संभावित जोखिम वाले बिंदुओं की पहचान और त्वरित सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही लोगों को सुरक्षित पानी के उपयोग को लेकर जागरूक करने पर भी जोर रहेगा।
इलाज का खर्च नहीं उठाएंगे मरीज
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इलाज का आर्थिक बोझ किसी भी प्रभावित परिवार पर न पड़े। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज और डिस्चार्ज के समय बिल वसूली न हो, इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर स्तर पर तय की गई है। अस्पताल प्रबंधन को भी इस संबंध में सख्त निर्देश दिए गए हैं।
घर-घर निगरानी
भागीरथपुरा क्षेत्र को छोटे-छोटे जोनों में बांटकर हर 50 से 100 घरों पर एक प्रभारी अधिकारी तैनात किया जाएगा। डिस्चार्ज हुए मरीजों से लगातार संपर्क रखा जाएगा ताकि बीमारी दोबारा न उभरे। वहीं, मेन पाइपलाइन से जुड़े सभी सरकारी बोरवेल सील करने का निर्णय लिया गया है। जल टंकी को सुरक्षित बताया गया है और 13 जनवरी से जलप्रदाय शुरू होगा, हालांकि एहतियात के तौर पर पानी उबालकर पीने की सलाह जारी रहेगी।
