हकलाने से लेकर स्कोलियोसिस तक, ग्रीक गॉड बनने से पहले ऋतिक रोशन का दर्दभरा बचपन

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Published On: 10 January 2026

आज ऋतिक रोशन को देखकर शायद ही कोई सोच पाए कि ये वही बच्चा था, जिसे बोलने में डर लगता था, जो खुद से भागकर कभी बाथरूम तो कभी अलमारी में जाकर छिप जाता था। बॉलीवुड के ‘ग्रीक गॉड’ कहलाने वाले ऋतिक की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही संघर्षों से भरी रही है। हैंडसम लुक, शानदार डांस और मजबूत फिजिक के पीछे सालों की मेहनत और दर्द छुपा है।

ऋतिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को मुंबई में एक फिल्मी परिवार में हुआ। पिता राकेश रोशन जाने-माने डायरेक्टर और निर्माता हैं, दादा रोशनलाल नागरथ संगीतकार थे और चाचा राजेश रोशन ने भी म्यूजिक की दुनिया में बड़ा नाम कमाया। ऐसे परिवार में पैदा होने के बाद लोग मान लेते हैं कि जिंदगी आसान होगी, लेकिन ऋतिक के लिए बचपन बिल्कुल भी आसान नहीं था।

ऋतिक रोशन ने छीना आत्मविश्वास

ऋतिक बचपन से ही स्टैमरिंग यानी हकलाने की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके लिए छोटे-छोटे शब्द बोलना भी किसी जंग से कम नहीं था। स्कूल में जब टीचर सवाल पूछते, तो वह डर जाते। कई बार क्लासमेट्स उनका मजाक भी उड़ाते थे। इस डर और शर्मिंदगी की वजह से ऋतिक खुद को अकेले में बंद कर लेते थे। कभी बाथरूम, तो कभी अलमारी बस ताकि किसी से बात न करनी पड़े। यह दौर किसी भी बच्चे के लिए मानसिक तौर पर बहुत भारी होता है। लेकिन ऋतिक ने धीरे-धीरे खुद को संभालना शुरू किया। उन्होंने तय कर लिया कि वह अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाएंगे।

मेहनत से बदली किस्मत

ऋतिक ने हकलाने की समस्या से लड़ने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने रोज अखबार पढ़ना शुरू किया—हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू तीनों भाषाओं में। वह शब्दों को जोर-जोर से बोलते, खुद को सुनते और फिर सुधार करते। यह प्रक्रिया आसान नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे उनकी बोलने की क्षमता बेहतर होने लगी। इसके साथ ही उनका आत्मविश्वास भी बढ़ने लगा। यही वजह है कि आज जब ऋतिक स्क्रीन पर लंबे डायलॉग बोलते हैं, तो शायद ही कोई अंदाजा लगा पाता है कि कभी उन्हें एक वाक्य बोलने में भी पसीना आ जाता था।

आई दूसरी बड़ी चुनौती

हकलाने की समस्या से उबरने के बाद ऋतिक की जिंदगी में एक और बड़ा झटका आया। 21 साल की उम्र में उन्हें स्कोलियोसिस नाम की गंभीर बीमारी का पता चला। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है, जिससे पीठ दर्द, चलने में परेशानी और गंभीर मामलों में सांस लेने तक में दिक्कत हो सकती है।

डॉक्टरों ने ऋतिक को साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने एक्टिंग या डांस जैसे फिजिकल प्रोफेशन को चुना, तो उन्हें जिंदगीभर डिसेबिलिटी का सामना करना पड़ सकता है। उस वक्त ऋतिक बहुत दुबले-पतले थे और डॉक्टरों का मानना था कि वह कभी मजबूत शरीर नहीं बना पाएंगे।

हार मानने का नाम नहीं था

लेकिन ऋतिक रोशन उन लोगों में से नहीं हैं जो हालात के आगे झुक जाएं। उन्होंने स्कोलियोसिस के बारे में खुद रिसर्च करना शुरू किया, सही फिजियोथेरेपी ली और अपने शरीर को समझकर मेहनत की। यह सफर लंबा और दर्दनाक था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इस बीमारी पर काबू पाया। यही मेहनत आगे चलकर उनकी पहचान बनी। जिस इंसान से कहा गया था कि वह कभी फिजिक नहीं बना पाएगा, वही इंसान आज फिटनेस का आइकन माना जाता है।

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