ग्वालियर हाईकोर्ट ने कपिल अग्रवाल की याचिका को विशेष शर्तों के साथ फिर से सुनवाई के लिए मंजूर किया है। अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा पिछले आदेश को पूरा करने में हुई 19 दिन की देरी को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुधार का अवसर दिया है। अब अदालत ने तय किया है कि कपिल अग्रवाल को 15 दिनों के भीतर ग्वालियर स्थित ‘मर्सी होम’ जाना होगा। वहां उन्हें कम से कम एक घंटे तक उपस्थित रहना होगा और बच्चों तथा बुजुर्गों को लगभग 1000 रुपए मूल्य की फल या मिठाई वितरित करनी होगी।
केवल वितरण ही नहीं, बल्कि अदालत ने निर्देश दिया कि कपिल अग्रवाल को अपने अनुभव को लिखित रूप में दर्ज करना होगा। रिपोर्ट में उन्हें यह बताना होगा कि ‘मर्सी होम’ की व्यवस्थाओं में सुधार कैसे किया जा सकता है और सेवा के दौरान उन्होंने क्या देखा। यह कदम अदालत की पहल को और प्रभावी बनाता है।
ग्वालियर हाईकोर्ट
यह मामला पहले के आदेश से जुड़ा हुआ है, जिसमें अदालत ने कपिल अग्रवाल को ‘स्वर्ग सदन’ में सेवा करने और 2000 रुपए की खाद्य सामग्री लेकर वहां बच्चों और जरूरतमंदों तक पहुँचाने का निर्देश दिया था। उस समय निर्धारित समय में आदेश पूरा न होने के कारण देरी हुई थी। कपिल अग्रवाल ने अदालत के सामने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में सुधार का वादा किया। अदालत ने उनकी तत्परता और सुधार की इच्छा को देखते हुए देरी को माफ कर दिया। इसके साथ ही याचिका को फिर से सुनवाई के लिए बहाल कर दिया गया।
अदालत की सख्ती
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आदेश को समय पर न पूरा करना गंभीर मामला है, लेकिन सुधार और सेवा के अवसर प्रदान करना भी न्याय का हिस्सा है। इस प्रकार की कार्रवाई समाज में सेवा और जिम्मेदारी का महत्व समझाने का प्रयास मानी जा रही है। इस आदेश से यह संदेश भी दिया गया है कि समाज में सेवा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सम्मान का काम है। अदालत का यह कदम याचिकाकर्ता और अन्य नागरिकों दोनों के लिए प्रेरक साबित हो सकता है।
