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जबलपुर में 2 नई तहसीलों की इमारतों का काम शुरू, पोड़ा और कटंगी से 200 से ज्यादा गांवों को मिलेगा फायदा

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Published On: 12 January 2026

जबलपुर जिले में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पोड़ा और कटंगी—इन दो नई तहसीलों की इमारतों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। तहसील भवनों के लिए चिन्हित जमीन पर मौजूद अतिक्रमण हटा दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने पहले अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए थे। नोटिस मिलने के बाद कुछ लोगों ने स्वेच्छा से कब्जा हटाया, जबकि शेष अवैध निर्माण बुलडोजर की कार्रवाई में हटाए गए।

अब तक जबलपुर में मझौली और पाटन सहित कुल 10 तहसीलें थीं। पोड़ा तहसील के गठन से 99 गांवों के ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। दरअसल, मझौली से पोड़ा की दूरी काफी अधिक है। ग्रामीणों को सिहोरा होते हुए करीब 50 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। जमीन से जुड़े कामों के लिए महिलाओं, बच्चों और किसानों को खासा परेशान होना पड़ता था। नई तहसील बनने से यह दूरी और परेशानी दोनों कम होंगी।

जबलपुर में ग्रामीणों को राहत

इसी तरह कटंगी तहसील के गठन से 100 से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों को राहत मिलेगी। अभी तक उन्हें करीब 20 किलोमीटर दूर पाटन तहसील जाना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर ही सभी राजस्व और प्रशासनिक कार्य निपटाए जा सकेंगे। फिलहाल पोड़ा तहसील में ललित ग्वालवंशी और कटंगी तहसील में राजेश कौशिक तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

करीब 9 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली पोड़ा तहसील की जमीन पर 12 से 15 अवैध मकान बने हुए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि यह आबादी की जमीन नहीं है। नोटिस के बाद कुछ परिवारों ने स्वयं घर खाली कर दिए, जबकि कुछ निर्माण बुलडोजर से हटाए गए। ग्रामीण राजेंद्र प्रसाद शर्मा और उनके परिवार की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें उर्मिला दाहिया के मकान में अस्थायी रूप से शिफ्ट कराया।

पोड़ा तहसील से मिलेंगी ये सुविधाएं

पोड़ा तहसीलदार ललित ग्वालवंशी के अनुसार, नई तहसील शुरू होने से भू-राजस्व से जुड़े काम जैसे जमीन की खरीद-बिक्री, रिकॉर्ड का रखरखाव, लगान वसूली और भूमि विवादों का निपटारा आसान होगा। इसके साथ ही कानून व्यवस्था, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, जनगणना, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य और विभिन्न प्रमाण पत्रों का जारी होना भी स्थानीय स्तर पर संभव होगा। अब पोड़ा और आसपास के गांवों के लोगों को मझौली नहीं जाना पड़ेगा।

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