भोपाल में मंगलवार को नगर निगम की ओर से एक नई पहल की शुरुआत की गई। शहर के सभी 85 वार्डों में एक साथ पहली बार ‘जल सुनवाई’ आयोजित की गई। यह सुनवाई सुबह 11 बजे शुरू होकर दोपहर 1 बजे तक चली, जिसमें आम नागरिकों ने पेयजल से जुड़ी अपनी समस्याएं और शिकायतें अधिकारियों के सामने रखीं। कई वार्डों में लोगों ने पानी की गुणवत्ता, सप्लाई की अनियमितता और बदबूदार पानी को लेकर सवाल उठाए।
जहां एक ओर वार्ड क्रमांक 22 में निगम अधिकारी शिकायतकर्ताओं का इंतजार करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर निशातपुरा के ब्रिज विहार इलाके के रहवासी बड़ी संख्या में आईएसबीटी स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। इन रहवासियों का आरोप है कि उन्हें कार्बाइड युक्त जहरीला पानी पीने को मजबूर किया जा रहा है।
भोपाल में जल सुनवाई
ब्रिज विहार और आसपास के इलाकों से पहुंचे लोगों ने नगर परिषद बैठक कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और जल्द समाधान की मांग की। उनका कहना था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। रहवासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से करीब 23 लोगों की मौत के बाद प्रदेशभर में जल गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। भोपाल के आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव जैसे इलाकों में भी दूषित पानी मिलने की पुष्टि हुई है, जिसके चलते वहां भूजल के उपयोग पर रोक लगाई गई है। प्रदेश के कई जिलों से लगातार गंदे पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
हर मंगलवार होगी जल सुनवाई
सरकार ने हालात को देखते हुए फैसला लिया है कि अब हर मंगलवार को जनसुनवाई की तर्ज पर ‘जल सुनवाई’ आयोजित की जाएगी। इस दौरान नगर निगम और जल प्रदाय विभाग के अधिकारी विशेषज्ञों के साथ बैठकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल सुनवाई के दौरान लोग अपने घरों से पानी के नमूने भी जमा करा सकेंगे। इन नमूनों की जांच रंग, स्वाद, गंध, पीएच, कुल क्षारीयता, क्लोराइड, टीडीएस, टरबीडिटी, रेसिडुअल क्लोरीन, कोलीफार्म और ई-कोलाई जैसे मानकों पर की जाएगी, ताकि पानी की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सभी वार्ड कार्यालयों में व्यवस्था
निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि जल सुनवाई हर वार्ड कार्यालय में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। उद्देश्य यही है कि लोगों को अपनी समस्या बताने के लिए निगम मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें और शिकायत का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो सके।
