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मकर संक्रांति पर नर्मदा तट के लिए धर्म यात्रा रवाना, महापौर मालती राय ने दिखाई हरी झंडी

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Published On: 14 January 2026

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भोपाल में आस्था और श्रद्धा का विशेष दृश्य देखने को मिला। नगर की महापौर मालती राय ने आनंद नगर से मां नर्मदा के तट तक जाने वाली धर्म यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बन गया। बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में महापौर मालती राय ने धर्म यात्रा में शामिल बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जैसे ही बसें रवाना हुईं, श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट की। धर्म यात्रा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को नर्मदा तट तक सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से दर्शन के लिए पहुंचाना है।

यह धर्म यात्रा सर्वधर्म तीर्थ दर्शन समिति के तत्वावधान में आयोजित की गई। समिति का उद्देश्य धार्मिक यात्राओं के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। समिति के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष मकर संक्रांति पर इस तरह की यात्राओं का आयोजन किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोग धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकें।

मकर संक्रांति

धर्म यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आनंद नगर क्षेत्र से सुबह ही लोग यात्रा स्थल पर एकत्र होने लगे थे। बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी ने इस आयोजन को और खास बना दिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि नर्मदा दर्शन उनके लिए केवल यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति का माध्यम है। धर्म यात्रा के शुभारंभ अवसर पर पार्षद एवं जोन अध्यक्ष राजेश चौकसे, पार्षद जीत राजपूत, वरिष्ठ समाजसेवी गोविंद गोयल और विपिन चौकसे सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने वाला प्रयास बताया।

महापौर ने दी शुभकामनाएं

महापौर मालती राय ने श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कामना की कि सभी श्रद्धालुओं की यात्रा मंगलमय और सुरक्षित रहे तथा मां नर्मदा की कृपा सभी पर बनी रहे। इस तरह की संगठित धर्म यात्राएं धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजनों से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूती मिलती है।

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