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जबलपुर के नालों का पानी बना जहर, हाईकोर्ट सख्स; रकार को तुरंत कदम उठाने के निर्देश

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Published On: 15 January 2026

जबलपुर में नालों के गंदे पानी से सब्जी उगाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से पेश की गई जांच रिपोर्ट ने हालात की भयावह तस्वीर सामने रख दी। रिपोर्ट के मुताबिक शहर के लगभग सभी प्रमुख नालों में भारी मात्रा में सीवेज मिला हुआ है, जिससे यह पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई और प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा दिए गए सुझावों पर तत्काल अमल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है।

जबलपुर में स्वास्थ्य संकट की चेतावनी

प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में चेताया गया है कि यदि नालों का यह दूषित पानी किसी भी तरह से पेयजल पाइपलाइन में मिल गया, तो यह बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि घरों से निकलने वाले सीवेज को सीधे नालों में जाने से तुरंत रोका जाए और नाले के पानी के किसी भी प्रकार के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए।

नवंबर में लिए गए थे सैंपल

प्रदूषण बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर कृषि, स्वास्थ्य और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला सहित अन्य स्थानों से पानी के सैंपल लिए थे। जांच में बीओडी, टोटल कॉलीफॉर्म और फीकल कॉलीफॉर्म की मात्रा तय मानकों से कई गुना अधिक पाई गई।

एनजीटी का दंड अब तक बकाया

मामले में यह भी खुलासा हुआ कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर जबलपुर नगर निगम पर 17.80 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय दंड लगाया गया था। यह दंड जुलाई 2020 से मार्च 2025 के बीच सीवेज सीधे नदियों और नालों में छोड़ने के कारण लगाया गया, लेकिन अब तक राशि जमा नहीं की गई है। कोर्ट ने इस पर जिला कलेक्टर से जवाब मांगा है। रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर में रोजाना करीब 174 मिलियन लीटर सीवेज निकलता है। शहर में मौजूद 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सिर्फ 75.14 मिलियन लीटर पानी का ही उपचार कर पा रहे हैं। नतीजतन करीब 98.86 मिलियन लीटर बिना उपचारित गंदा पानी सीधे नालों में पहुंच रहा है, जो शहर के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

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