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AIIMS भोपाल में अब नहीं भटकेंगे मरीज, AI नेविगेशन से लेकर रोबोट और एग्रीटेक तक; स्टार्टअप्स बदल रहे सिस्टम

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Published On: 16 January 2026

भोपाल एम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सबसे बड़ी परेशानी अस्पताल परिसर के भीतर रास्ता ढूंढने की होती है। पैथोलॉजी, एमआरआई, ओपीडी या किसी खास विभाग तक पहुंचने में लोग अक्सर भटक जाते हैं और बार-बार पूछताछ में कीमती समय बर्बाद होता है। इस समस्या के समाधान के लिए भोपाल के एक स्टार्टअप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेविगेशन सिस्टम तैयार किया है। एम्स के मोबाइल एप या परिसर में लगे बारकोड को स्कैन करने के बाद गूगल मैप की तरह मरीज और विजिटर अपनी मंजिल सर्च कर सकेंगे और AI उन्हें सही रास्ता दिखाएगा।

भोपाल के होटल ताज में आयोजित रीजनल AI कॉन्फ्रेंस में ऐसे कई स्टार्टअप्स सामने आए, जो सरकारी सिस्टम और आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को तकनीक के जरिए हल कर रहे हैं। स्वास्थ्य, सफाई, कृषि, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

AIIMS भोपाल

इंदौर की फ्रबिरोबोटिक्स के रोहिताश दुबे ने C-1 क्लीनिंग रोबोट के बारे में बताया। यह रोबोट झाड़ू, पोछा और स्क्रबिंग तीनों काम करता है और एक घंटे में करीब 10 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र की सफाई कर सकता है। यह पूरी तरह ऑटोनॉमस है और अस्पतालों, होटलों व बड़े दफ्तरों में इस्तेमाल हो रहा है। इसके साथ ही 500 किलो तक वजन ढोने वाला आउटडोर लॉजिस्टिक्स रोबोट भी तैयार किया गया है, जिसकी टेस्टिंग भारत के साथ अमेरिका में हो रही है।

AI से कम्युनिकेशन स्किल्स की ट्रेनिंग

ग्वालियर स्थित ‘कॉमन स्कूल’ स्टार्टअप के कृष्णकांत ने बताया कि उनका प्लेटफॉर्म AI रोल-प्ले के जरिए बोलने और संवाद कौशल सिखाता है। अब तक 40 हजार से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इस स्टार्टअप को फेसबुक, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मंडी और एचडीएफसी बैंक का सहयोग मिल चुका है।

भोपाल बेस्ड एग्रीटेक स्टार्टअप ‘एग्रीदूत’ किसानों को AI, सैटेलाइट और डिवाइस की मदद से फसल की बीमारी, मौसम बदलाव, सिंचाई और मिट्टी की स्थिति की जानकारी देता है। को-फाउंडर मृदुल श्रीवास्तव के अनुसार अब तक 30 हजार किसान इससे जुड़ चुके हैं और खेती ज्यादा वैज्ञानिक व किफायती हो रही है।

ग्रामीण स्वास्थ्य और सिंहस्थ के लिए रोबोट

‘मेडिवेंड’ स्टार्टअप ने ग्रामीण इलाकों के लिए AI चैटबॉट आधारित मशीन बनाई है, जिससे मरीज डॉक्टर से सलाह लेकर दवाएं भी पा सकते हैं। वहीं ‘यंगोवेटर’ के उदित ठक्कर ने एमपी का पहला 3डी प्रिंटेड रोबोट तैयार किया है, जो सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को जानकारी देगा।

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