छिंदवाड़ा में जहरीला कफ सिरप पीने से 25 मासूम बच्चों की मौत के बहुचर्चित मामले में गिरफ्तार डॉक्टर प्रवीण सोनी की जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी डॉक्टर की ओर से कोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा गया कि बच्चों की मौत के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार दवा लिखी थी और यदि सिरप में जहरीले तत्व पाए गए, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित दवा निर्माता कंपनी की बनती है।
आरोपी डॉक्टर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि डॉक्टर को यह जानकारी नहीं थी कि जिस कफ सिरप का उपयोग किया जा रहा है, उसमें जहरीले तत्व मौजूद हैं। डॉक्टर ने मरीजों को वही दवा दी, जो बाजार में वैध रूप से उपलब्ध थी। ऐसे में दवा की गुणवत्ता, निर्माण और जांच की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की है। कोर्ट ने फिलहाल डॉक्टर की दलीलों को सुना और मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी।
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार और अन्य हस्तक्षेपकर्ताओं का पक्ष सुना जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है। न्यायालय ने अभी जमानत पर कोई फैसला नहीं सुनाया है। गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में 6 अक्टूबर को डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तब से वे छिंदवाड़ा जेल में बंद हैं।
कमीशन के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
इस मामले में डॉक्टर की मुश्किलें उस वक्त और बढ़ गईं, जब जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि परासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर प्रवीण सोनी को कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिखने के बदले श्रीसन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड से 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। एक सिरप की एमआरपी 89 रुपए बताई गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कई दवाइयां डॉक्टर की पत्नी और भतीजे की मेडिकल दुकान पर बेची जाती थीं।
जांच के घेरे में डॉक्टर और दवा कंपनी
इस खुलासे के बाद मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। आरोप है कि कमीशन के लालच में बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता किया गया। पुलिस और प्रशासन की जांच में डॉक्टर की भूमिका के साथ-साथ दवा कंपनी की जिम्मेदारी भी तय करने की प्रक्रिया जारी है। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देश और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
