सतना के प्रतिष्ठित क्रिस्टकुला मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल (पतेरी) में मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे एक 8 वर्षीय छात्र का हाथ टूटने की घटना सामने आई। स्कूल के अंदर हुई यह घटना बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। घटना के तुरंत बाद स्कूल प्रबंधन ने न तो परिजनों को सूचित किया और न ही स्थिति को गंभीरता से लेने का दिखावा किया।
छुट्टी के समय परिजन जब बच्चे को लेने पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उसका हाथ पूरी तरह से नहीं उठ रहा है और बच्चा दर्द में रो रहा था। परिजनों ने तुरंत स्कूल प्रबंधन से मामले की जानकारी मांगी, लेकिन प्रबंधन ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। जब परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की, तो स्कूल ने इसे देखने से इनकार कर दिया।
सतना में शिकायत दर्ज कराने में बाधा
परिजन जैसे ही शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे थे, स्कूल प्रबंधन ने उन्हें दबाव डालकर शिकायत वापस लेने या दर्ज न कराने की कोशिश शुरू कर दी। इस तरह की प्रतिक्रिया से परिजनों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई। घटना के गंभीर होने और स्कूल द्वारा इसे छिपाने की कोशिश किए जाने से शहर में चिंता की लहर दौड़ गई है।
पहले की घटना भी संदिग्ध
यह घटना इसलिए और गंभीर मानी जा रही है क्योंकि कुछ दिन पहले ही सतना के सीएमए स्कूल (अमौधा/पतेरी) में भी एक समान घटना हुई थी। वहां 6 वर्षीय छात्रा को होमवर्क न करने पर शिक्षिका द्वारा लगाए गए थप्पड़ से बच्ची गिर पड़ी और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। इस मामले में पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
सवाल स्कूलों की सुरक्षा को लेकर
दोनों घटनाओं ने निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के नाम पर होने वाली शारीरिक हानि को लेकर अभिभावकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है या केवल प्रतिष्ठा बचाने में लगा है। अभिभावक और नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि क्रिस्टकुला स्कूल वाली घटना की स्वतंत्र जांच की जाए। साथ ही सीसीटीवी फुटेज जब्त कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस घटना ने शहर में निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिर से ध्यान खींचा है।
