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महाकाल महोत्सव का तीसरा दिन, सोना महापात्रा की शिवभक्ति ने महाकाल लोक को जयघोष से भर दिया

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Published On: 17 January 2026

उज्जैन में आयोजित महाकाल महोत्सव का तीसरा दिन शुक्रवार को पूरी तरह शिवभक्ति, लोक-संस्कृति और समकालीन संगीत के संगम में डूबा नजर आया। महाकाल लोक के मुक्त आकाशी मंच पर हुई सांस्कृतिक संध्या ने श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। जैसे ही सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका सोना महापात्रा ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत “जय काल महाकाल” से की, पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

वीर भारत न्यास और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत की विविध विधाओं का सुंदर समावेश देखने को मिला। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ भगवान गणेश की वंदना से हुआ, जिसके बाद भगवान शिव को समर्पित विशेष शिव वंदना प्रस्तुत की गई। चार स्वरों पर आधारित इस प्रस्तुति ने अपनी सरलता और आध्यात्मिक भाव से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

महाकाल महोत्सव का तीसरा दिन

शिव वंदना के बाद सोना महापात्रा ने अपने लोकप्रिय गीत “आजा ओ आजा” से मंच पर समकालीन संगीत का रंग बिखेरा। इसके साथ ही राजस्थानी लोकगीत की प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। विवाह परंपरा से जुड़े इस लोकगीत, जिसे संत मीरा बाई की रचना माना जाता है, ने दर्शकों को भारतीय लोक-संस्कृति की जड़ों से जोड़ा। गीत की भाव-भंगिमा और सुरों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

सह-कलाकारों ने बढ़ाया भावनात्मक प्रभाव

कार्यक्रम के दौरान सोना महापात्रा की टीम के कलाकार साहिल सोलंकी ने “लगी तेरे संग प्रीत मेरे शंकरा” गीत प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और शिवभक्ति की अनुभूति को और गहरा कर दिया। पूरी सांस्कृतिक संध्या के दौरान महाकाल लोक श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संगीत प्रेमियों से खचाखच भरा रहा।

अतिथियों ने किया कलाकारों का सम्मान

कार्यक्रम से पहले कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक, नरेश शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने सोना महापात्रा का सम्मान किया। उन्होंने महोत्सव के माध्यम से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की।

‘कला यात्रा’ ने बिखेरी लोकनृत्य की छटा

वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महोत्सव के तीसरे दिन ‘कला यात्रा’ का भी भव्य आयोजन हुआ। इस यात्रा में उज्जैन की मयूरी डोड और उनके दल ने आकर्षक ‘मटकी लोकनृत्य’ प्रस्तुत किया। यह कला यात्रा शास्त्री नगर से प्रारंभ होकर नीलगंगा चौराहा और हाट बाजार होते हुए महाकाल लोक पर समाप्त हुई, जिसने पूरे शहर में उत्सव का माहौल बना दिया।

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