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सतना में 150 करोड़ की सड़क पर भ्रष्टाचार का आरोप, PWD अफसरों की मिलीभगत उजागर

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Published On: 19 January 2026

सतना जिले में नागौद से मैहर तक बनाई जा रही करीब 150 करोड़ रुपए की सड़क परियोजना अब भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई है। इस बहुप्रतीक्षित सड़क के निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि PWD के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सड़क निर्माण में भारी गड़बड़ियां की गईं।

जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण में अनिवार्य WMM (वेट मिक्स मैकाडम) प्लांट का उपयोग ही नहीं किया गया। इसके बजाय ओवर साइज, रिजेक्ट और सॉफ्ट स्टोन के पत्थर सड़क की परतों में बिछा दिए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सामग्री से बनी सड़क ज्यादा समय तक टिकाऊ नहीं होती और कुछ ही वर्षों में जर्जर हो सकती है।

सतना में भ्रष्टाचार

सिर्फ सड़क की परतों में ही नहीं, बल्कि CRM की निर्धारित चौड़ाई और पुल-पुलियों के निर्माण में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। मानकों के विपरीत निर्माण से न सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि भविष्य में हादसों का खतरा भी बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों ने भी निर्माण गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायतें की थीं।

नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं

मामला सामने आने के बाद PWD के चीफ इंजीनियर ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदार रविशंकर जायसवाल को नोटिस जारी किया था। हालांकि, नोटिस की समय-सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, प्रभारी SDO पहले ही खुलेआम यह कहते सुने गए थे कि अधिकारियों में उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है और वह जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की कुर्सियां तक बदलवा सकते हैं। इस बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है और विभाग के भीतर कथित दबाव की ओर इशारा करता है।

कतरा रहे अफसर

बताया जा रहा है कि अन्य विभागों के अधिकारी भी जुर्माना तय करने या स्पष्ट रिपोर्ट देने से हिचक रहे हैं। डर और दबाव के माहौल में जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह भ्रष्टाचार का उदाहरण बनकर रह जाएगा और सरकारी योजनाओं पर भरोसा कमजोर होगा।

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