सतना शहर की जलावर्धन योजना में पाइपलाइन बिछाने के काम में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। शहर के विभिन्न हिस्सों में बिछाई गई पाइपलाइनें ठीक तरीके से जमीन के अंदर नहीं डाली गईं, जिससे छोटे दबाव पर ही पाइप फटने लगी हैं।
आमतौर पर पाइपलाइन को जमीन की सतह से कम से कम 1 मीटर (लगभग 3.3 फीट) नीचे बिछाना अनिवार्य है। जहां भारी वाहनों का आवागमन होता है, वहां यह गहराई 1.2 से 1.5 मीटर तक रखी जाती है। यह प्रक्रिया पाइपलाइन की मजबूती और दबाव सहने की क्षमता सुनिश्चित करती है। लेकिन सतना में पाइपलाइन को सीधे सतह के पास बिछाकर केवल मिट्टी से ढंक दिया गया।
सतना में जलावर्धन योजना में भ्रष्टाचार
सड़क निर्माण और पाइपलाइन कार्य में मिट्टी को अच्छी तरह से दबाकर भरना (Compaction) अनिवार्य होता है। यह भविष्य में जमीन धंसने और पाइपलाइन टूटने से बचाता है। सतना की योजना में इस मानक की भी अनदेखी हुई। यही कारण है कि कल शहर के एक हिस्से में पाइपलाइन फूट गई और पानी की सप्लाई बाधित हो गई।
जनता में बढ़ी परेशानी
पाइपलाइन फूटने से प्रभावित क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है और छोटी समस्या भी बड़ी बन रही है। जनता का कहना है कि भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ सामान्य नागरिक तक सही तरीके से नहीं पहुँच पा रहा।
स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद आज तक किसी अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। शहरवासियों का मानना है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते सतना की जल आपूर्ति लगातार प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों की राय
अधिकारियों और इंजीनियरों का कहना है कि पाइपलाइन की सही गहराई और मिट्टी का दबाव न देने से भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। शहर की जल आपूर्ति योजना को सुचारू बनाए रखने के लिए तुरंत जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है।
