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MP नगर में 150 पुराने पेड़ों पर संकट, कर्मचारियों और पर्यावरणविदों का चिपको आंदोलन

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Published On: 22 January 2026

भोपाल के अयोध्या बायपास और रत्नागिरी के बाद अब MP नगर क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। यहां प्रस्तावित खाद्य भवन के निर्माण के लिए करीब 150 पुराने पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है। ये पेड़ लगभग 50 वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं, जो क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन और हरियाली के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

पेड़ कटाई के प्रस्ताव के विरोध में पर्यावरणविदों और सरकारी कर्मचारियों ने गुरुवार को अनोखा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों से चिपककर ‘चिपको आंदोलन’ की तर्ज पर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कई महिला कर्मचारी भी हाथों में तख्तियां लेकर आंदोलन में शामिल हुईं और खुले तौर पर पेड़ों को काटने के फैसले का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास के नाम पर हरियाली को खत्म करना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

MP नगर में 150 पुराने पेड़ों पर संकट

जानकारी के अनुसार, वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा करीब 64 करोड़ रुपये की लागत से सभी संबंधित दफ्तरों को एक स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए छह मंजिला नए भवन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह भवन एमपी नगर स्थित नाप-तौल नियंत्रक कार्यालय की जमीन पर बनाया जाना प्रस्तावित है। सभी सुविधाओं सहित इस परियोजना पर कुल खर्च 90 से 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

पहले से मौजूद हैं विभागों के भवन

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब संबंधित विभागों के अपने-अपने भवन पहले से मौजूद हैं, तो नई इमारत बनाने की आवश्यकता क्यों है। वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की गौतम नगर में बड़ी इमारत पहले से मौजूद है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का संचालनालय विंध्याचल भवन में संचालित हो रहा है, जबकि नाप-तौल विभाग की मुख्य बिल्डिंग भी इसी परिसर में स्थित है। केवल नागरिक आपूर्ति निगम ही किराए की निजी बिल्डिंग में संचालित हो रहा है।

पुरानी इमारत की स्थिति पर सवाल

वर्तमान में प्रस्तावित स्थल पर नाप-तौल विभाग का मुख्यालय स्थित है। संभागीय और जिला कार्यालय पहले ही जेके रोड पर स्थानांतरित किए जा चुके हैं। यह इमारत करीब 50 वर्ष पुरानी है, लेकिन अब भी बेहतर स्थिति में है। रोचक तथ्य यह है कि नाप-तौल विभाग ने कुछ महीने पहले ही पास की जमीन शासन से मांगने का प्रस्ताव रखा था।

पर्यावरणविदों और कर्मचारियों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए पेड़ों की बलि देना सही नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि वैकल्पिक स्थान तलाशा जाए या फिर निर्माण की योजना को इस तरह बदला जाए, जिससे अधिक से अधिक पेड़ों को बचाया जा सके। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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