गरीबी में बीता बचपन, संघर्ष बना ताकत; विशाल जेठवा की कहानी कर देगी भावुक

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Published On: 23 January 2026

हिंदी सिनेमा में कई कलाकार ऐसे हैं जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ प्रेरणा नहीं देतीं, बल्कि दिल को छू जाती हैं। आज हम जिस अभिनेता की बात कर रहे हैं, उसकी जिंदगी संघर्ष, सब्र और आत्मविश्वास की मिसाल है। बचपन में मां को दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करते और पिता को सड़क किनारे नारियल पानी बेचते देखने वाला यह लड़का आज इंटरनेशनल मंच पर भारत का नाम रोशन कर चुका है। यह कहानी है 31 साल के अभिनेता विशाल जेठवा की।

विशाल जेठवा की कहानी

विशाल जेठवा का बचपन बेहद साधारण और संघर्षों से भरा रहा। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी आसान नहीं था। उनकी मां घर-घर जाकर काम करती थीं, कभी झाड़ू-पोछा, तो कभी सुपरमार्केट में काम। पिता सड़क पर नारियल पानी बेचकर परिवार का पेट पालते थे। विशाल ने बहुत कम उम्र में जिम्मेदारियों और मुश्किलों का मतलब समझ लिया था।

इन हालातों में पले-बढ़े विशाल के लिए सपने देखना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हालातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनके अंदर कुछ अलग करने की चाह धीरे-धीरे मजबूत होती चली गई।

अभिनय की दुनिया

विशाल जेठवा का फिल्मी सफर अचानक चमकने वाला नहीं रहा। साल 2014 में उन्होंने फिल्म ‘डर @ द मॉल’ से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन इस फिल्म में उन्हें खास पहचान नहीं मिल पाई। इसके बाद भी उन्हें छोटे-छोटे रोल ही मिले, जिनसे न नाम मिला और न ही शोहरत।

2017 में वह एक फिल्म में चाय बेचने वाले के छोटे से किरदार में नजर आए। उस दौर में कई बार ऐसा लगा कि शायद मेहनत बेकार जा रही है, लेकिन विशाल ने खुद पर भरोसा बनाए रखा और लगातार काम करते रहे।

मर्दानी 2’ से बदली किस्मत

विशाल के करियर का सबसे बड़ा मोड़ आया फिल्म ‘मर्दानी 2’ से। इस फिल्म में उन्होंने एक खतरनाक सीरियल किलर का किरदार निभाया। उनका अभिनय इतना दमदार और डरावना था कि दर्शक हैरान रह गए। यही फिल्म उनके लिए पहचान बन गई। इस रोल के बाद विशाल जेठवा को इंडस्ट्री में गंभीर अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा और उनके काम की तारीफ हर तरफ होने लगी।

इसके बाद विशाल की जिंदगी में आया फिल्म ‘होमबाउंड’ का चैप्टर। इस फिल्म ने उन्हें इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहुंचा दिया। कांस फिल्म फेस्टिवल में फिल्म को करीब 9 मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला, जो किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।

फिल्म भारत की ओर से ऑस्कर 2026 की शॉर्टलिस्ट तक भी पहुंची। हालांकि फाइनल नॉमिनेशन में जगह नहीं बन पाई, लेकिन विशाल के लिए यह सफर किसी जीत से कम नहीं था।

अपनी जड़ों पर गर्व करते हैं विशाल

एक इंटरव्यू में विशाल ने खुलकर अपनी जिंदगी के संघर्षों पर बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह कांस जैसे बड़े मंच पर इसलिए आत्मविश्वास से भरे थे, क्योंकि उन्हें अपनी सच्चाई से डर नहीं लगता। उनकी बहन ने उनसे कहा था कि तुम एक कामवाली बाई के बेटे हो और इसमें शर्म की कोई बात नहीं यही बात विशाल की ताकत बन गई।

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