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77वां गणतंत्र दिवस: इतिहास, परंपरा और आज की जिम्मेदारी

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Published On: 25 January 2026

हर साल 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) आती है, लेकिन यह दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह दिन भारत के आत्मसम्मान, उसके संविधान, उसके लोकतंत्र और उसकी करोड़ों धड़कनों का उत्सव है। गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आज़ादी केवल इतिहास की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान की जिम्मेदारी भी है। जब सुबह तिरंगा लहराता है और राष्ट्रगान की धुन हवा में गूंजती है, तो मन के भीतर कुछ बदल जाता है। दिल में गर्व भी होता है, भावुकता भी, और एक सवाल भी कि क्या हम सच में उस भारत के नागरिक हैं, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था?

26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया और खुद को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया। यह सिर्फ कानूनों की किताब नहीं थी… यह भारत के भविष्य की नींव थी।

77वां गणतंत्र दिवस

डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के सदस्यों ने एक ऐसे देश के लिए संविधान तैयार किया, जो भाषा, धर्म, जाति और संस्कृति की विविधताओं से भरा हुआ था। संविधान ने हमें अधिकार दिए लेकिन साथ ही कर्तव्यों का बोध भी कराया। संविधान हमें यह सिखाता है कि आज़ादी का अर्थ केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है। अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक तक, खेल से लेकर विज्ञान तक भारत ने अपनी वैश्विक पहचान बनाई है।

लेकिन साथ-साथ चुनौतियाँ भी हैं गरीबी, बेरोज़गारी, सामाजिक असमानता, शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्याएँ। गणतंत्र दिवस हमें सिर्फ उपलब्धियाँ गिनाने का मौका नहीं देता बल्कि यह आत्ममंथन करने का भी दिन है कि क्या हम भारत को बेहतर बना रहे हैं?

दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड

अब बात करते हैं कि आखिर पूरे देशभर में इसे किस तरह मनाया जाता है। सबसे पहले बताएंगे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बारे में… नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड भारत की शक्ति और विविधता का प्रतीक है। इस परेड में भारतीय सेना की शौर्य गाथा, अत्याधुनिक हथियार और सैन्य शक्ति, राज्यों की रंगीन झांकियां, भारत की सांस्कृतिक विविधता और बच्चों, कलाकारों और युवाओं की प्रतिभा दिखती है।

गांवों में गणतंत्र दिवस

अगर शहरों में गणतंत्र दिवस भव्यता का पर्व है, तो गांवों में यह दिल से मनाया जाने वाला त्योहार है। सुबह स्कूल के मैदान में ध्वजारोहण होता है। बच्चे राष्ट्रगान गाते हैं। ग्रामीण स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां सुनाते हैं। छोटे-छोटे मंचों पर देशभक्ति नाटक होते हैं। कई गांवों में यह दिन केवल उत्सव नहीं यह पहचान का दिन होता है कि गांव भी भारत की रीढ़ हैं।

शहरों में गणतंत्र दिवस

शहरों में गणतंत्र दिवस की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती है। स्कूलों में रिहर्सल, सरकारी दफ्तरों में सजावट, सोसायटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम हर जगह तिरंगे की छाया होती है, लेकिन यह भी सच है कि शहरी जीवन की भागदौड़ में कई लोग इस दिन को केवल छुट्टी समझ लेते हैं। यहीं से सवाल उठता है कि क्या हमारी देशभक्ति केवल एक दिन की औपचारिकता बनकर रह गई है?

बच्चों के लिए गणतंत्र दिवस

बच्चों के लिए यह दिन बहुत खास होता है। वे तिरंगे की पोशाक पहनते हैं, देशभक्ति गीत गाते हैं, मंच पर भाषण देते हैं। यही बच्चे भविष्य के नागरिक बनते हैं। गणतंत्र दिवस उनके भीतर यह भावना बोता है कि भारत सिर्फ एक देश नहीं, एक जिम्मेदारी है। जब हम परेड देखते हैं, तो हमें याद आता है कि यह देश केवल भाषणों से सुरक्षित नहीं है कि यह सैनिकों के त्याग से सुरक्षित है। सीमाओं पर तैनात जवान, कठिन परिस्थितियों में डटे सैनिक वे गणतंत्र दिवस को मंच पर नहीं, मोर्चे पर मनाते हैं। उनकी वजह से ही हम आज सुरक्षित लोकतंत्र में सांस ले रहे हैं।

किसान, मजदूर और आम नागरिक

भारत का गणराज्य केवल नेताओं से नहीं बनता यह किसान, मजदूर, शिक्षक, डॉक्टर, छात्र और हर आम नागरिक से बनता है। जो किसान खेतों में अन्न उगाता है, जो मजदूर इमारतें बनाता है, जो शिक्षक बच्चों को शिक्षा देता है वही असली गणतंत्र के स्तंभ हैं।

गणतंत्र दिवस की तैयारी

  • स्कूलों में बच्चों की रिहर्सल
  • सेना की परेड की तैयारी
  • सरकारी इमारतों की सजावट
  • झांकियों की रूपरेखा
  • घरों में तिरंगे और मिठाइयां

गणतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति

भारत कई भाषाओं, धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों का संगम है। गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि हम अलग-अलग होकर भी एक हैं। उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम हर कोने में यह दिन अपने-अपने रंग में मनाया जाता है, लेकिन भावना एक ही होती है भारत माता के प्रति प्रेम।

मेरे लिए गणतंत्र दिवस क्या है?

मेरे लिए गणतंत्र दिवस सिर्फ एक सरकारी अवकाश नहीं है। यह आत्ममंथन का दिन है। यह सोचने का दिन है कि क्या मैं एक जिम्मेदार नागरिक हूं? क्या मैं संविधान के मूल्यों का सम्मान करता हूं? क्या मैं अपने देश को बेहतर बनाने में योगदान दे रहा हूं? जब राष्ट्रगान बजता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब तिरंगा हवा में लहराता है, तो मन गर्व से भर जाता है। उस पल एहसास होता है कि भारत केवल एक भूगोल नहीं… यह भावना है, पहचान है, आत्मा है।

गणतंत्र दिवस हमें यह सिखाता है कि आज़ादी को केवल याद करना काफी नहीं, बल्कि उसे निभाना भी जरूरी है। हमें हर दिन यह संकल्प लेना चाहिए कि हम संविधान का सम्मान करेंगे, एकता बनाए रखेंगे और भारत को एक बेहतर राष्ट्र बनाने में योगदान देंगे। यह दिन हमें जोड़ता है गांव से शहर तक, गरीब से अमीर तक, बच्चे से बुजुर्ग तक।गणतंत्र दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं… यह भारत की धड़कन है। यह हमारे स्वाभिमान की आवाज़ है और यह हर भारतीय के दिल में बसता हुआ सपना है।

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