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77वें गणतंत्र दिवस पर भोपाल में भव्य राज्य स्तरीय समारोह, लाल परेड मैदान पर दिखा देशभक्ति का अद्भुत नजारा

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Published On: 26 January 2026

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रध्वज फहराने के साथ हुई, जहां राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। पूरे मैदान में देशभक्ति और गर्व का माहौल देखने को मिला। समारोह के दौरान पुलिस बैंड ने राष्ट्रगान की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इसके बाद हर्ष फायर के साथ राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक सलामी दी गई। यह पल दर्शकों के लिए गर्व और भावनाओं से भरा रहा, जहां हर नागरिक राष्ट्रप्रेम में डूबा नजर आया।

कार्यक्रम में सशस्त्र बलों और पुलिस की संयुक्त परेड आयोजित की गई, जिसमें कुल 23 टुकड़ियों ने भाग लिया। परेड में अनुशासन, साहस और समर्पण की झलक साफ दिखाई दी। अश्वारोही दल की शानदार प्रस्तुति और श्वान दस्ते के कौशल ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

भोपाल में भव्य राज्य स्तरीय समारोह

गणतंत्र दिवस परेड के दौरान प्रदेश सरकार के 22 विभागों की रंग-बिरंगी और आकर्षक झांकियां निकाली गईं। इन झांकियों के माध्यम से राज्य की प्रमुख योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और विकास कार्यों को प्रदर्शित किया गया।
उद्यानिकी, आयुष, उच्च शिक्षा, कृषि, गृह, जनजातीय कार्य, नगरीय विकास, पर्यटन, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, वन और स्कूल शिक्षा सहित कई विभागों की झांकियों ने प्रदेश की प्रगति और सामाजिक सरोकारों की झलक पेश की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता दर्शकों का दिल

समारोह में सागर पब्लिक स्कूल, कटारा एक्सटेंशन, भोपाल के छात्र-छात्राओं ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। ‘संविधान से संस्कृति तक एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में करीब 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया। भरतनाट्यम, कथक, मोहिनीअट्टम, ओडिसी, मणिपुरी और कथकली जैसे शास्त्रीय नृत्यों के माध्यम से संविधान के मूल मूल्यों न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

‘वंदे मातरम्’ के साथ गूंजा एकता का संदेश

कार्यक्रम के समापन पर ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कलाकारों ने अनेकता में एकता का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा। पूरा समारोह देश की लोकतांत्रिक परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और विकास की भावना का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया।

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