भोपाल में मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (CMHO) कार्यालय द्वारा जारी पत्रों और अपनाई जा रही जांच प्रक्रिया को लेकर एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कार्यालय की कार्यप्रणाली में निरंतर त्रुटियां और भ्रमित करने वाले निर्देश नजर आ रहे हैं, जिससे निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
रवि परमार के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को उन्हें सीएमएचओ कार्यालय से एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें उन्हें उसी दिन 11:30 बजे जिला स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। लेकिन पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस शिकायत, किस विषय या किस शिकायत क्रमांक के संबंध में उन्हें बुलाया गया है। पत्र में दो जगह 28 जनवरी 2025 की तिथि अंकित थी, जबकि यह पत्र 28 जनवरी 2026 को मिला। इस त्रुटि से भ्रम और प्रशासनिक लापरवाही उजागर होती है।
भोपाल में CMHO कार्यालय
रवि परमार ने आरोप लगाया कि पत्र प्राप्त होने से एक दिन पूर्व एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप के माध्यम से अपठनीय संदेश भेजा और कार्यालय आने को कहा। जब उनसे शिकायत का विवरण मांगा गया, तो कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संबंधित मोबाइल नंबर शासकीय है, क्या उसे मोबाइल भत्ता मिलता है, और क्या इस तरह की प्रक्रिया जांच का हिस्सा बन सकती है।
पूर्व आरोप
रवि परमार ने कहा कि 07 जनवरी 2026 को सीएमएचओ कार्यालय में उन्हें बुलाकर झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया गया। इसके लिए उन्होंने थाना हबीबगंज में आवेदन भी दिया था। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कार्यालय में किसी भी अप्रिय घटना की संभावना बनी रहती है।
रवि परमार ने स्पष्ट किया कि वे जांच में सहयोग देने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना विषय, शिकायत क्रमांक या समयबद्ध सूचना के बुलाया जाना केवल दबाव बनाने का प्रयास प्रतीत होता है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विधिसम्मत तरीके अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रशासनिक निर्देश की मांग
रवि परमार ने मांग की कि भविष्य में किसी भी जांच या सुनवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट सूचना प्रदान की जाए। पत्राचार में विषय, तिथि, शिकायत क्रमांक और संक्षिप्त विवरण अनिवार्य रूप से अंकित होना चाहिए। उन्होंने सीएमएचओ कार्यालय की त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली पर प्रशासनिक संज्ञान लेने और आवश्यक निर्देश जारी करने की भी अपील की।
रवि परमार ने कहा कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखते रहेंगे और किसी भी प्रकार की दबाव या डर की राजनीति स्वीकार नहीं करेंगे।
