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वैश्विक संकट के बीच भारत का बजट 2026 बना दुनिया की उम्मीद, न्यूयॉर्क से लंदन तक टिकी सबकी नजर

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Published On: 30 January 2026

जब पूरी दुनिया युद्ध, महंगाई, ऊंची ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, ऐसे दौर में भारत का आम बजट 2026 सिर्फ एक घरेलू आर्थिक दस्तावेज नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक अहम संकेत बनकर उभरा है, जिसका असर अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक महसूस किया जा सकता है। IMF और World Bank जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के बजट को इस नजर से देख रही हैं कि क्या भारत वैश्विक मंदी के बीच स्थिरता का इंजन बन सकता है। अमेरिका और यूरोप में ऊंची ब्याज दरें, पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी युद्ध तथा चीन की आर्थिक सुस्ती से कमजोर पड़े वैश्विक व्यापार के बीच भारत का बजट अंतरराष्ट्रीय मंच पर खास महत्व हासिल कर चुका है और दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध और बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच पेश होने वाला भारत का बजट इस समय अंतरराष्ट्रीय मंच पर खासा ध्यान खींच रहा है। IMF, World Bank और वैश्विक निवेशक इसे भारत की आर्थिक दिशा, विकास रणनीति, निवेश माहौल और वित्तीय स्थिरता के रोडमैप के रूप में देख रहे हैं।

भारत बजट 2026

भारत का आम बजट अब सिर्फ देश की आर्थिक योजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक दस्तावेज बन चुका है। IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं बजट के हर प्रावधान पर नजर रखती हैं, क्योंकि इसका असर भारत की आर्थिक स्थिरता, विकास दर और सुधारों की दिशा पर पड़ता है। बजट में किए गए फैसले विदेशी निवेश, रुपये की स्थिति, शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट को प्रभावित करते हैं, जिसकी गूंज न्यूयॉर्क से लेकर लंदन तक के वित्तीय बाजारों में सुनाई देती है। इसी वजह से भारत का बजट अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक अहम संकेतक माना जा रहा है।

IMF-वर्ल्ड बैंक को भारत की ग्रोथ पर भरोसा

IMF और वर्ल्ड बैंक के अनुसार भारत आने वाले वित्त वर्ष में भी 6.5 से 7 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक विकास दर बनाए रख सकता है, इसी कारण वैश्विक एजेंसियों की नजर भारत के बजट पर टिकी हुई है। Reuters और Bloomberg की रिपोर्टों में कहा गया है कि विदेशी निवेशक राजकोषीय घाटे, पूंजीगत खर्च, रक्षा व्यय और सामाजिक योजनाओं से जुड़े फैसलों को बारीकी से देख रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि भारत वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच निवेश-अनुकूल माहौल कैसे बनाए रखता है।

खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और ग्रीन एनर्जी पर बजटीय फोकस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

भारत की वित्तीय नीति से है दुनिया को उम्मीद

World Bank के अनुसार, यदि भारत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकासोन्मुख खर्च को बढ़ाता है तो इससे न सिर्फ घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक विकास को भी सहारा मिल सकता है। वहीं IMF ने आगाह किया है कि भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए जोखिम बने रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत का बजट केवल देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एशिया, अफ्रीका और अन्य उभरती अर्थव्यस्थाओं के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में यदि भारत संतुलित और जिम्मेदार बजट पेश करता है, तो यह संदेश जाएगा कि वैश्विक संकट के दौर में भी एक लोकतांत्रिक और विकासशील अर्थव्यवस्था स्थिरता के साथ आगे बढ़ सकती है।

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