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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का मामला राज्यसभा में उठा, सरकार से जवाब की मांग

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Published On: 2 February 2026

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों का मामला सोमवार को राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने सदन में इस गंभीर मुद्दे को रखते हुए कहा कि पानी केवल बुनियादी जरूरत नहीं, बल्कि मानव जीवन का सबसे संवेदनशील सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को जहरीला पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है और इसके परिणामस्वरूप लगातार जानें जा रही हैं।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि जल से जुड़े विभागों में भ्रष्टाचार की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, शायद ही कोई दूसरा विभाग हो जहां इस स्तर का करप्शन हो। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से स्पष्ट शब्दों में पूछा कि आखिर दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार के पास क्या ठोस कार्ययोजना है और ग्राउंड वाटर की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

इंदौर का भागीरथपुरा

सदन में अपनी बात रखते हुए तिवारी ने कहा कि यह सिर्फ इंदौर या मध्य प्रदेश का सवाल नहीं है, बल्कि पूरे देश की मानवता से जुड़ा विषय है। उन्होंने गुजरात के गांधी नगर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी प्रदूषित पानी से लोग बीमार पड़े थे। इंदौर में अब तक 29 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जो सरकार और सिस्टम की विफलता को उजागर करता है।

इमरान प्रतापगढ़ी ने मांगी जवाबदेही

महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस मामले में केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि इंदौर में दूषित पानी पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन मौतों की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या जल शक्ति मंत्रालय ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है और क्या कोई रिपोर्ट तलब की गई है।

इससे पहले कर्नाटक से राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन भी इंदौर के जल आपूर्ति और स्वच्छता सिस्टम को लेकर सरकार से सवाल कर चुके हैं। उन्होंने इंदौर मॉडल पर भी सवालिया निशान लगाए थे, जिसे अक्सर देश के लिए उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता है।

मौतों का आंकड़ा 32 तक पहुंचा

भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला अब भी थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, इलाज के दौरान एक और व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो चुकी है। स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे साफ पानी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय की मांग कर रहे हैं।

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