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दूषित पानी पर दावों की पोल, भोपाल में 25 दिन बाद भी हालात जस के तस

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Published On: 3 February 2026

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत के बाद भोपाल प्रशासन अलर्ट मोड में आया था। इसके बाद पानी की जांच और सीवेज लाइनों से पेयजल पाइपलाइन हटाने के काम तेज करने के दावे किए गए। इसी के बाद भोपाल में भी नगर निगम ने पानी सप्लाई और सीवेज व्यवस्था सुधारने के लिए अभियान शुरू किया। हालांकि करीब 25 दिन बीत जाने के बाद भी जमीनी हालात में खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। निगम व्यवस्था सुधारने के दावे कर रहा है, लेकिन कई इलाकों में लोगों को अभी भी दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

वार्ड-70 में नाली के पानी को ‘शुद्ध’ बताए जाने के बाद जब प्रभावित क्षेत्रों का रियलिटी चेक किया गया तो कई चौंकाने वाली स्थितियां सामने आईं। टीम उन इलाकों में पहुंची, जहां सबसे ज्यादा दूषित पानी की शिकायतें मिल रही थीं। जांच के दौरान पता चला कि कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन सीवेज के बीच से गुजर रही है, जिससे पानी दूषित होने का खतरा बना हुआ है।

भोपाल में 25 दिन बाद भी हालात जस के तस

वार्ड-86 के अयोध्या एक्सटेंशन इलाके में रहवासी लंबे समय से गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासी प्रीति दुबे ने बताया कि पीने के पानी की पाइपलाइन नाली के बीच से गुजर रही है। नाली में करीब एक फीट तक गंदगी जमा है और पाइपलाइन में जोड़ होने के कारण गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल रहा है। उन्होंने बताया कि नगर निगम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत करने के बावजूद नाली की सफाई नहीं कराई गई।

रहवासियों को खुद उठाना पड़ रहा खर्च

इलाके के लोगों का कहना है कि भूमिगत पानी की टंकी की सफाई करीब डेढ़ साल से नहीं हुई है। यह टंकी स्लम क्षेत्र में स्थित है, जहां आसपास कचरा डाला जाता है। प्रताप सिंह रहंडाले ने बताया कि पहले टंकी की सफाई के दौरान बेस का प्लास्टर उखड़ा हुआ पाया गया था, लेकिन अब तक उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब कार्रवाई नहीं हुई तो रहवासियों को खुद नाली साफ करवानी पड़ रही है, जिस पर लगभग 3500 रुपए खर्च आ रहा है।

खुद खुदवाना पड़ा ट्यूबवेल

लगातार गंदे पानी की समस्या से परेशान रहवासी अब वैकल्पिक व्यवस्था करने को मजबूर हैं। उर्मिला पटेल ने बताया कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों को अपने स्तर पर ट्यूबवेल खुदवाना पड़ा, ताकि पीने के लिए साफ पानी मिल सके। इस स्थिति ने नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है।

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