MP सरकार ने सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित हजारों आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि 25,602 विस्थापित आदिवासी परिवारों को दिए गए आवासीय भूखंडों की रजिस्ट्री अब सरकार खुद कराएगी। इसके लिए परिवारों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार करीब 600 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस फैसले से आठ विधानसभा क्षेत्रों और चार जिलों के हजारों परिवारों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरदार सरोवर परियोजना के दौरान प्रभावित परिवारों को पुनर्वास के तहत आवासीय भूखंडों के पट्टे दिए गए थे, लेकिन उनकी विधिवत रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। लंबे समय से विस्थापित परिवारों द्वारा रजिस्ट्री कराने की मांग उठाई जा रही थी। सरकार के इस फैसले को उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपने आवासीय भूखंडों पर कानूनी अधिकार मिल सकेगा।
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कैबिनेट बैठक में राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए धनवाही और बरही सिंचाई परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने से किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी और खेती की उत्पादकता बढ़ेगी। इसके साथ ही सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कई विभागों की योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया, जिससे विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहे।
बैठक में प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग में विलय करने की स्वीकृति दी गई है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
पुष्प महोत्सव और पशुपतिनाथ लोक का भी जिक्र
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल में आयोजित पुष्प महोत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल फूलों की प्रदर्शनी नहीं था, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। साथ ही महाकाल लोक की तर्ज पर तैयार किए गए पशुपतिनाथ लोक के लोकार्पण की जानकारी भी दी गई। बैठक में यह भी बताया गया कि सरकार ने भावांतर योजना के भुगतान को दो माह के भीतर पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया है।
