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सतना एयरपोर्ट की 12 एकड़ जमीन फिर सरकार के नाम, धोखाधड़ी से निजीकरण रद्द

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Published On: 4 February 2026

सतना हवाई अड्डे के विस्तार में वर्षों से सबसे बड़ी बाधा बनी 12.31 एकड़ जमीन को आखिरकार सरकार ने वापस अपने कब्जे में ले लिया है। धोखाधड़ी और फर्जी पंजीकरण के जरिए निजी नामों पर दर्ज की गई इस जमीन को अब दोबारा शासकीय संपत्ति घोषित कर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के नाम रजिस्टर्ड कर दिया गया है। इस फैसले से सतना एयरपोर्ट के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जगी है।

जानकारी के अनुसार, यह भूमि वर्ष 1976 में विमानन विभाग (नव विभाग) के नाम दर्ज थी। समय के साथ इसमें हेराफेरी की गई और गलत तरीके से निजी व्यक्तियों व संस्थानों के नाम पंजीकरण करा लिया गया। लंबे समय से इस गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद राजस्व विभाग ने मामले की गहन जांच शुरू की।

सतना एयरपोर्ट

राजस्व विभाग की जांच और खसरा सुधार प्रक्रिया के बाद साफ हुआ कि जमीन का निजीकरण नियमों के खिलाफ किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए निजी नामों को निरस्त किया और पूरी 12.31 एकड़ जमीन AAI के नाम दर्ज कर दी। यह कदम एयरपोर्ट के आसपास चल रहे भूमि घोटालों पर सरकार की सख्ती को भी दर्शाता है।

रनवे विस्तार का रास्ता साफ

इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर सतना एयरपोर्ट के रनवे विस्तार पर पड़ेगा। अब रनवे को 1800 मीटर तक बढ़ाने में आ रही प्रमुख रुकावट खत्म हो गई है। माना जा रहा है कि विस्तार के बाद यहां बड़े विमानों की आवाजाही संभव होगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सतना एयरपोर्ट की जमीन को लेकर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सैकड़ों एकड़ भूमि पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, अब जिस तरह से सरकार ने ठोस कदम उठाया है, उससे यह संकेत मिल रहा है कि भविष्य में ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

स्थानीय विकास को मिलेगी रफ्तार

एयरपोर्ट विस्तार से न सिर्फ हवाई सेवाएं बेहतर होंगी, बल्कि सतना और आसपास के जिलों में व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि जमीन विवाद सुलझने के बाद विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे और क्षेत्र को बड़ा फायदा मिलेगा।

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