जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने के मामले में मोहन यादव सरकार आज बड़ा फैसला ले सकती है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के चलते विजय शाह पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। राज्य सरकार पर अब कोर्ट को जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
इस संवेदनशील मामले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संविधान विशेषज्ञों से लंबी चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, कानूनी पहलुओं के साथ-साथ राजनीतिक असर पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री आज उत्तराखंड से दिल्ली लौटने के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर सकते हैं, जिसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी।
मोहन यादव सरकार की नजर
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती। मामले से जुड़े सभी तथ्यों, एसआईटी की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है। चूंकि यह मामला एक कैबिनेट मंत्री से जुड़ा है, इसलिए अभियोजन स्वीकृति देने का अंतिम अधिकार मुख्यमंत्री के पास है और फैसला उन्हीं के अनुमोदन से होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के खिलाफ एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को समाप्त हो चुकी है, जबकि कार्यदिवसों के हिसाब से 5 फरवरी अंतिम दिन माना जा रहा है। इसके बावजूद अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे कोर्ट की नाराजगी की आशंका जताई जा रही है।
9 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को निर्धारित है। कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी ने करीब छह महीने पहले अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि करते हुए विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने की सिफारिश की गई है।
यह पूरा मामला पिछले साल 11 मई को महू के रायकुंडा गांव में दिए गए विजय शाह के बयान से जुड़ा है। एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसे लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अब सरकार के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।
