हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है, जिसे शास्त्रों में माता यशोदा के प्राकट्य दिवस के रूप में बताया गया है। माता यशोदा वही हैं जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपने पुत्र रूप में स्नेहपूर्वक लालन-पालन किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन दिन विधि-विधान से माता यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि यशोदा जयंती पर श्रद्धापूर्वक पूजन करने से सूनी गोद भरने का आशीर्वाद भी मिलता है।
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को प्रत्येक वर्ष यशोदा जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण की पालक मां मां यशोदा की जन्म-जयंती का पावन अवसर है। इस विशेष दिन पर श्रद्धालु माँ यशोदा की गहन ममता, त्याग और परम प्रेम को याद करते हैं।
यशोदा जयंती
यशोदा जयंती के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की माता यशोदा मैया की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्हें वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और कृष्ण–यशोदा की लीलाओं का स्मरण किया जाता है। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, कथा और विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां भक्तों ने यशोदा मैया के त्याग, प्रेम और पालन-पोषण के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
महत्व
यशोदा जयंती हिन्दू धर्म का एक पवित्र त्योहार है जो भगवान श्री कृष्ण की पालक माता, माता यशोदा के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त माता यशोदा की ममतापूर्ण, निःस्वार्थ प्रेम भरी आदर्श माँ की भूमिका को सम्मान देते हैं, जिन्होंने भगवान कृष्ण को अपने पुत्र की तरह पाला-पोसा और बचपन में उनकी रक्षा की थी। इस दिवस पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और श्रीमद्भागवत की कथाएँ पढ़कर उनके अनुकरणीय मातृत्व, प्रेम और त्याग को याद किया जाता है, साथ ही संतान-सुख, पारिवारिक सौहार्द और भावनात्मक शक्ति के लिए आशीर्वाद की कामना भी की जाती है।
शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 7 फरवरी 2026 को रात 01:18 बजे प्रारंभ होगी और यह तिथि 8 फरवरी 2026 को रात 02:54 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि को मान्यता दिए जाने के कारण यशोदा जयंती का व्रत 7 फरवरी 2026, शनिवार को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ रखा जाएगा।
पूजा विधि
- यशोदा जयंती के दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं।
- मां यशोदा के समक्ष व्रत रखने का संकल्प लेते हैं।
- लकड़ी की चौकी या पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण और मां यशोदा की तस्वीर स्थापित की जाती है।
- पूजा में सिंदूर, रोली, पीला चंदन, फूल, माला और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
- भोग में मिठाई, फल, तुलसी दल और जल चढ़ाया जाता है, वहीं श्रीकृष्ण को विशेष रूप से माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।
- इसके पश्चात घी का दीपक और धूप जलाकर मां यशोदा व भगवान श्रीकृष्ण की आरती की जाती है।
- और गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है।
- पूजा के अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा मांगी जाती है और सभी को प्रसाद वितरित किया जाता है।
- व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन अन्न और नमक का सेवन नहीं करतीं, बल्कि फलाहार पर रहकर व्रत का पालन करती हैं।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
