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इंदौर की यूथ वॉक 2026 ने बनाया इतिहास, नशा-उन्मूलन जागरूकता अभियान दर्ज हुआ वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में

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Published On: 8 February 2026

इंदौर में आयोजित युवा नशा-उन्मूलन जागरूकता वॉक (यूथ वॉक-2026) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 8 फरवरी 2026 को हुए इस आयोजन ने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (लंदन) में अपना नाम दर्ज कराते हुए इंदौर को वैश्विक पहचान दिलाई। नशे के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित इस वॉक में करीब 10 हजार युवाओं की सक्रिय भागीदारी दर्ज की गई, जिससे यह कार्यक्रम विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया।

यूथ वॉक की शुरुआत सुबह 9 बजे नेहरू स्टेडियम से हुई। करीब 3 किलोमीटर लंबी इस वॉक में युवाओं का जोश और ऊर्जा देखने लायक थी। हाथों में नशा विरोधी संदेशों की तख्तियां और नारों के साथ युवा पूरे उत्साह से आगे बढ़ते नजर आए। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का मकसद युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें खेल, शिक्षा व सामाजिक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना है।

इंदौर की यूथ वॉक 2026

कार्यक्रम के आयोजक रुद्राक्ष गोलू शुक्ला ने बताया कि यूथ वॉक का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं था, बल्कि समाज में एक मजबूत संदेश देना था। उनका दावा है कि कार्यक्रम में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20 हजार से अधिक लोग जुड़े। उन्होंने कहा कि जब युवा खुद आगे आकर नशे के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उसका असर लंबे समय तक समाज में दिखाई देता है।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री खगेंद्र भार्गव और बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। अपने संबोधन में खगेंद्र भार्गव ने कहा कि भारत की लगभग आधी आबादी युवा है और यही वजह है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में लेने की साजिशें हो रही हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहकर देश और समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

देश की सबसे बड़ी ताकत

बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ें, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने यूथ वॉक–2026 जैसी पहल को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और बदलाव लाने का काम करते हैं।

यूथ वॉक–2026 ने यह साबित कर दिया कि जब समाज और युवा एक साथ किसी उद्देश्य के लिए खड़े होते हैं, तो उसका असर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देता है। इंदौर का यह आयोजन नशा-उन्मूलन के क्षेत्र में एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

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