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नर्मदा घाटी परियोजना में 11 साल बाद खुला वित्तीय घोटाला, कंपनी और बैंक अधिकारी पर एफआईआर

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Published On: 9 February 2026

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की नहर निर्माण परियोजना में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। करीब 11 साल बाद हुए इस खुलासे ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पनागर थाने में कर्नाटक लैंड आर्मी बेंगलुरु नामक कंपनी और यूनियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है। मामला सरकारी राशि के दुरुपयोग और बैंकिंग प्रक्रियाओं में मिलीभगत से जुड़ा बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2004 में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने कुंड वितरण नहर और वितरण नहर प्रणाली के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया था। यह ठेका मेसर्स कर्नाटक लैंड आर्मी बेंगलुरु को मिला था। नियमों के तहत कंपनी को सुरक्षा राशि के रूप में दो एफडीआर जमा करनी थीं, जिसकी कुल राशि 43 लाख 75 हजार रुपए बताई गई थी। यह एफडीआर प्राधिकरण के नाम पर बैंक में जमा कराई गई थीं।

नर्मदा घाटी परियोजना

आरोप है कि तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद कंपनी ने नहर निर्माण का काम शुरू ही नहीं किया। इसके बावजूद प्राधिकरण के पास जमा ईएमडी राशि के साथ छेड़छाड़ की गई। जांच में सामने आया कि करीब 88 लाख रुपए की राशि को छलपूर्वक नकदी में बदल लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने साल तक यह मामला सामने नहीं आ सका।

रिपोर्ट से हुआ खुलासा

इस पूरे घोटाले का खुलासा लोक लेखा समिति की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ। रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से जाली एफडीआर तैयार कर 2015 में ही राशि तुड़वा ली थी। यह प्रक्रिया नियमों के बिल्कुल विपरीत थी और इसमें बैंक स्तर पर गंभीर लापरवाही या जानबूझकर की गई कार्रवाई की आशंका जताई गई।

वर्ष 2023 में जब नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने कार्य नहीं करने वाली कंपनी की एफडीआर राशि राजसात करने की प्रक्रिया शुरू की, तब मामला और स्पष्ट हुआ। प्राधिकरण ने यूनियन बैंक के शाखा प्रबंधक को एफडीआर भुनाने के लिए पत्र लिखा, लेकिन बैंक की ओर से खाता नंबर नहीं मिलने का हवाला देकर जवाब टाल दिया गया। इसके बाद प्राधिकरण ने पनागर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

अधिकारी पर एफआईआर

पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर केवी मलैश ने तत्कालीन बैंक अधिकारी से सांठगांठ कर एफडीआर तुड़वाई थी। इस आधार पर पुलिस ने कंपनी मैनेजर और यूनियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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