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जनगणना 2026 का बिगुल: इंदौर से शुरू हुई तैयारियां, पहली बार मिलेगी सेल्फ-गणना की सुविधा

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Published On: 10 February 2026

देश की नई जनगणना को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होता दिख रहा है। जनगणना 2026 की तैयारियों का आगाज इंदौर जिले से हो गया है। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद प्रशासन ने जनगणना की रूपरेखा तय कर ली है। इस बार की जनगणना न सिर्फ पिछली बार से अलग होगी, बल्कि पूरी तरह डिजिटल और हाईटेक तरीके से की जाएगी।

अब तक जनगणना के दौरान सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करते थे, जिससे लोगों को समय देना पड़ता था। लेकिन इस बार सरकार ने आम जनता को बड़ी सुविधा दी है। नागरिक मोबाइल ऐप या पोर्टल के जरिए खुद अपनी और अपने मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस प्रक्रिया को सेल्फ-गणना नाम दिया गया है, जिससे पूरा काम तेज और आसान होगा।

जनगणना 2026 का बिगुल

जनगणना 2026 में प्रत्येक कर्मचारी को करीब 150 से 175 मकानों का सर्वे करना होगा। उन्हें कागज-कलम की जगह मोबाइल ऐप या टैबलेट के जरिए डिजिटल फॉर्म भरना होगा। डिजिटल प्रक्रिया के चलते जनगणना का काम पहले के मुकाबले कम समय में पूरा होने की उम्मीद है। जिला स्तर पर तैयार डेटा राज्य स्तर पर संकलित होकर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल स्वरूप है। कर्मचारियों को बड़े स्तर पर प्रशिक्षित करने के लिए मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति की जा रही है। डिजिटल एंट्री से न सिर्फ डेटा प्रोसेसिंग आसान होगी, बल्कि जनगणना के नतीजे भी पहले से जल्दी सामने आएंगे।

लापरवाही नहीं चलेगी

बैठक के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनगणना का काम तय समय सीमा में और पूरी गंभीरता से किया जाए। उन्होंने कहा कि डेटा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में किसी भी तरह की कमी न रहे।

डिजिटल जनगणना के लिए परिवार के मुखिया का आधार नंबर, मकान से जुड़ी जानकारी जैसे मकान नंबर, मकान का प्रकार और बुनियादी सुविधाओं का विवरण जरूरी होगा। दूसरे चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम, जन्म तिथि, शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति, धर्म और मातृभाषा की जानकारी देनी होगी। इसके लिए एक सक्रिय मोबाइल नंबर भी जरूरी रहेगा।

डिजिटल जनगणना से होंगे कई फायदे

डिजिटल सिस्टम से लोगों की जानकारी सीधे सरकारी सर्वर पर सुरक्षित रहेगी। समय की बचत होगी और खुद जानकारी भरने से गलतियों की संभावना भी कम होगी। प्रशासन का मानना है कि यह जनगणना व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित होगी।

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