भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन फेज-2 के रूट को लेकर नया विवाद सामने आया है। उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक आतिफ अकील ने भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान से अंडरग्राउंड मेट्रो रूट निकालने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मेट्रो कॉरपोरेशन के अफसरों से साफ शब्दों में कहा कि कब्रिस्तान से मेट्रो निकालना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यहां कई पीढ़ियों के लोगों को दफन किया गया है।
विधायक अकील ने बताया कि शाही वक्फ बोर्ड पहले ही इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुका है। अदालत से इस रूट पर फिलहाल स्टे मिला हुआ है। कोर्ट ने आगे की सुनवाई से पहले दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत सोमवार को मेट्रो अफसरों और वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों के साथ मौके पर बैठक और निरीक्षण किया गया।
भोपाल मेट्रो ऑरेंज लाइन
निरीक्षण के दौरान विधायक ने अफसरों से कहा कि कब्रिस्तान की धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट यहां से हटाया जाए और किसी वैकल्पिक मार्ग पर शिफ्ट किया जाए। बैठक में मप्र वक्फ बोर्ड के सदस्य हसन जैदी, आजम खान और मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि 21 दिसंबर से भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। अब दूसरे फेज में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो लाइन का काम चल रहा है। इस फेज की कुल लंबाई 16.74 किलोमीटर है, जिसमें से करीब 9.74 किलोमीटर हिस्से में निर्माण होना है।
एलिवेटेड और अंडरग्राउंड दोनों हिस्से
फेज-2 में 5.38 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जहां पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा पर 6 मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इस हिस्से पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, 3.39 किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड रहेगा, जिसमें भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड पर स्टेशन प्रस्तावित हैं। इस अंडरग्राउंड हिस्से की लागत करीब 890 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
भोपाल मेट्रो को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले ब्लू लाइन प्रोजेक्ट में भदभदा से रत्नागिरी तक के रूट को अंडरग्राउंड करने की मांग उठी थी। हालांकि, मेट्रो कॉरपोरेशन ने उस मांग को खारिज कर दिया था और एलिवेटेड रूट पर काम जारी रखा।
