नए लेबर लॉ और अन्य नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठनों की हड़ताल का असर इंदौर में भी दिखाई दिया। गुरुवार को आशा, उषा और परिवेशक कर्मचारी अखिल भारतीय संयुक्त अभियान समिति के बैनर तले गांधी हॉल परिसर में एकत्रित हुए और धरना प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को मुखर बना दिया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर श्रमिक हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि नई नीतियों से उनके अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। नारेबाजी के बीच उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी भी की।
इंदौर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने में शामिल कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को नजरअंदाज कर नीतियां बनाना अन्यायपूर्ण है।
संगठनों ने चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करने की मांग उठाई। इसके अलावा ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेने, बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने और SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) को वापस लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने मनरेगा की बहाली और विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को रद्द करने की भी मांग की।
सेवाओं पर सीमित असर
हालांकि धरना-प्रदर्शन के चलते कुछ क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ, लेकिन आवश्यक सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं हुईं। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना है।
संगठन अब प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर विचार कर रहे हैं। यदि मांगों पर चर्चा के लिए पहल नहीं होती, तो राज्यव्यापी प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
