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ग्वालियर में गलत सिलेबस का पेपर मिलने पर हंगामा, अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

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Published On: 21 February 2026

ग्वालियर के डॉन बॉस्को पब्लिक स्कूल के पांचवीं और आठवीं बोर्ड कक्षा के छात्रों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया। मामला अंग्रेजी की परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें छात्रों को कथित तौर पर गलत सिलेबस का प्रश्नपत्र थमा दिया गया। इस घटना से घबराए छात्र परीक्षा के बाद रोते हुए स्कूल पहुंचे और अभिभावकों को पूरी जानकारी दी। इसके बाद बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल में इकट्ठा हो गए।

घटना वायुनगर स्थित सनराइज पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां डॉन बॉस्को स्कूल के छात्रों का परीक्षा केंद्र बनाया गया था। दोपहर 2 बजे परीक्षा शुरू होते ही छात्रों को पहले एमपी बोर्ड इंग्लिश मीडियम का सामान्य प्रश्नपत्र दिया गया। कुछ देर बाद यह पेपर वापस लेकर एनसीईआरटी सिलेबस का प्रश्नपत्र बांट दिया गया। छात्रों का कहना है कि उन्हें पूरे साल एमपी बोर्ड का सिलेबस पढ़ाया गया था, ऐसे में अचानक सिलेबस बदलने से वे घबरा गए।

ग्वालियर में हंगामा

छात्रों के मुताबिक, परीक्षा के अंतिम 15 मिनट में दोबारा एमपी बोर्ड का प्रश्नपत्र दे दिया गया। इस असमंजस के कारण वे ठीक से उत्तर नहीं लिख पाए। कुछ विद्यार्थियों ने अतिरिक्त उत्तर पुस्तिकाएं न मिलने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा की तैयारी और आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित किया है।

अभिभावकों का गुस्सा

परीक्षा के बाद जब बच्चों ने घर पहुंचकर पूरी बात बताई तो अभिभावकों में नाराजगी फैल गई। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि प्राचार्य ने समस्या के समाधान के बजाय सभी बच्चों को पास कर देने की बात कही, जो उचित नहीं है। उनका तर्क है कि मेहनत करने वाले और कमजोर छात्रों को समान अंक देना न्यायसंगत नहीं होगा।

अगली परीक्षाओं को लेकर भी चिंता

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को इंटरनेट से एनसीईआरटी सिलेबस पढ़कर अगली परीक्षा देने की सलाह दी है। अभिभावकों का कहना है कि यह बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डालने जैसा है। घटना के बाद प्राचार्य से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे बिना प्रतिक्रिया दिए निकल गईं। उप-प्राचार्य ने भी मामले में सीधी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। अब अभिभावक शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

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