शहर के प्रसिद्ध नवग्रह शक्ति पीठ में पिछले दस दिनों से चल रहे धार्मिक अनुष्ठान का शुक्रवार को विधिवत समापन हुआ। नवग्रह प्राण-प्रतिष्ठा और महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम अपने अंतिम चरण में पहुंचा। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
अनुष्ठान के अंतिम दिन विशेष पूजा-अर्चना के बाद नवग्रह देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। इसके पश्चात मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। जैसे ही पट खुले, जयघोष और घंटों की ध्वनि से परिसर गूंज उठा। भक्तों ने नवग्रह देवताओं के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल कामना की।
नवग्रह शक्ति पीठ
इस अवसर पर स्वामी सदानंद सरस्वती, शारदा पीठ के शंकराचार्य, ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण और धार्मिक अनुष्ठान केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को संस्कार और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम हैं। उन्होंने इसे ईश्वरीय कृपा बताते हुए लोगों से सत्कर्म, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
विविध धार्मिक कार्यक्रम
अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन हवन, यज्ञ, भजन-संध्या और प्रवचन का आयोजन किया गया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। आयोजकों के अनुसार पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात की गई थी। समापन दिवस पर महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति दी।
आध्यात्मिक उत्साह का माहौल
समापन के साथ ही मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। दस दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बना दिया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता रहे।
