हमारे घरों में अक्सर दादी-नानी यह सलाह देती थीं कि अगर होंठ फट रहे हों, पेट में दर्द हो या त्वचा सूखी लग रही हो तो नाभि में सरसों का तेल लगाना फायदेमंद हो सकता है। कई लोगों का मानना है कि इससे उन्हें राहत भी मिलती है। आयुर्वेद में नाभि को शरीर का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान मां से शिशु को पोषण नाभि के माध्यम से ही मिलता है, इसलिए इसे ऊर्जा का केंद्र भी कहा जाता है। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार नाभि के आसपास कई छोटी नसें और रक्त वाहिकाएं होती हैं, ऐसे में यहां हल्की मालिश करने से आराम और सुकून जरूर मिल सकता है,आज भी पारंपरिक तौर पर लोग आज भी इस उपाय का इस्तेमाल करते हैं।
आयुर्वेद में नाभि को शरीर का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, इसलिए पुराने समय से ही नाभि पर तेल लगाने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि रोज रात को सोने से पहले नाभि में 2–3 बूंद तेल डालने और हल्की मालिश करने से शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।
नाभि पर लगाएं तेल
आजकल सेहत और त्वचा की देखभाल के लिए नाभि में तेल लगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नाभि शरीर का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जहां विभिन्न नसें जुड़ी होती हैं। ऐसे में रोजाना सोने से पहले नाभि पर सरसों, नारियल या बादाम का तेल लगाने से त्वचा को नमी मिलती है, होंठ फटने की समस्या कम हो सकती है और बालों की सेहत पर भी सकारात्मक असर देखने को मिलता है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर को आराम मिलता है, हालांकि डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लेनी चाहिए, ताकि किसी तरह की एलर्जी या दिक्कत से बचा जा सके।
सरसों का तेल
सरसों का तेल गर्म तासीर वाला माना जाता है और खासतौर पर सर्दियों में इसका उपयोग शरीर को राहत देने के लिए किया जाता है। माना जाता है कि नाभि पर सरसों का तेल लगाने से पेट से जुड़ी कुछ समस्याओं में आराम मिल सकता है। कई लोगों को गैस, सूजन और पेट में भारीपन जैसी दिक्कतों में हल्की राहत महसूस होती है। इसके लिए 2–3 बूंद सरसों का तेल नाभि में डालकर घड़ी की दिशा में हल्के हाथों से मालिश करने की सलाह दी जाती है, जिससे पेट की मांसपेशियों को आराम मिल सकता है।
नीम का तेल
नीम का तेल त्वचा के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे मुंहासों और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
अरंडी का तेल
अरंडी (कैस्टर) का तेल अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण पेट के आसपास होने वाली जकड़न या मांसपेशियों की अकड़न में हल्की राहत देने में मददगार माना जाता है। यह तेल त्वचा को मुलायम रखने के साथ-साथ सूजन और दर्द को कम करने में भी सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे कम मात्रा में लेकर हल्के हाथों से प्रभावित जगह पर मालिश करना लाभकारी रहता है।
नारियल तेल
नारियल तेल त्वचा की देखभाल के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। यह त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है, जिससे रूखापन कम होता है और त्वचा मुलायम बनी रहती है। गर्मियों में इसका उपयोग शरीर को ठंडक देने में भी मदद करता है, इसलिए यह संवेदनशील त्वचा वालों के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।
बादाम का तेल
बादाम का तेल पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और आयुर्वेद में इसे कई तरह से उपयोगी बताया गया है। मान्यता है कि नाभि पर बादाम का तेल लगाने से शरीर को आराम मिलता है और मन शांत महसूस हो सकता है। कुछ लोगों का अनुभव है कि इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होने में मदद मिलती है। साथ ही, यह तनाव और थकान कम करने में भी सहायक माना जाता है।
