मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल करीब 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी रेगुलराइजेशन सहित 9 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन पर उतर आए हैं। 25 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह प्रदेशव्यापी प्रदर्शन अब राजधानी में तेज होता नजर आ रहा है। हड़ताल और सामूहिक अवकाश के चलते कई जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भोपाल के जेपी अस्पताल परिसर में करीब तीन हजार कर्मचारी एकत्र होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारी सरकार और विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया है और बैरिकेडिंग कर सभी प्रमुख रास्ते बंद कर दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों को गेट के बाहर ही रोका गया है।
भोपाल में ‘न्याय यात्रा’
प्रदर्शन के दौरान एक भावुक दृश्य भी सामने आया। न्याय यात्रा में शामिल एक महिला कर्मचारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। वह अपने ढाई साल के बच्चे के साथ प्रदर्शन में शामिल होने आई थीं। साथी कर्मचारियों ने बच्चे को संभाला, जबकि महिला को स्वास्थ्य संचालनालय के सामने बने चबूतरे पर लिटाकर प्राथमिक देखभाल दी गई। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ देर अफरातफरी की स्थिति रही।
मार्च की कोशिश
प्रदर्शनकारी डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज कार्यालय से मुख्यमंत्री निवास तक न्याय मार्च निकालना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से आउटसोर्स व्यवस्था में काम करने के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। वे स्थायी नियुक्ति, वेतनमान और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
कई संगठनों का समर्थन
आंदोलन में एड्स कंट्रोल एम्प्लॉइज यूनियन, जॉइंट डेंगू-मलेरिया एम्प्लॉइज यूनियन, ऑल हेल्थ ऑफिसर्स एम्प्लॉइज फेडरेशन, कॉन्ट्रैक्ट आउटसोर्स्ड हेल्थ वर्कर्स यूनियन और नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।स्वास्थ्य सेवाओं पर असर को देखते हुए सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द वार्ता की संभावना जताई जा रही है।
