ग्वालियर में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े एक पुराने मामले में विशेष सत्र न्यायालय (NDPS) ने आरोपी गोपाल गुप्ता को 12 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने उसे फेंसिडिल सिरप की अवैध बिक्री और भंडारण का दोषी पाया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 जनवरी 2017 को Central Bureau of Narcotics, ग्वालियर को रवि नगर स्थित एक मकान में भारी मात्रा में फेंसिडिल सिरप के अवैध भंडारण की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने तत्काल कार्रवाई की और संबंधित पते पर छापा मारा।
ग्वालियर में 12 साल की सजा
छापेमारी के दौरान मकान के निचले हिस्से में बने गैराज से जूट की बोरियों और कार्टनों में रखी फेंसिडिल सिरप की 76 हजार 200 बोतलें बरामद की गईं। इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप का मिलना जांच एजेंसियों के लिए भी चौंकाने वाला था। बरामद सामग्री को जब्त कर आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
अभियोजन ने पेश किए पुख्ता साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जब्ती पंचनामा, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी तथ्यों और प्रमाणों पर विचार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मादक पदार्थों का अवैध व्यापार समाज और युवाओं के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे मामलों में कड़ी सजा आवश्यक है।
नशे के खिलाफ सख्त संदेश
इस फैसले को नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाओं का भंडारण संगठित तंत्र की ओर इशारा करता है, जिस पर सख्ती जरूरी है। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।
