ग्वालियर के हस्तिनापुर थाना क्षेत्र में एक मामूली यूपीआई भुगतान की उलझन ने बड़ा रूप ले लिया। गुंधारा चक गांव के कक्षा 10वीं के छात्र परमाल कुशवाह और उसके पिता साइबर ठगी का शिकार हो गए। 11 फरवरी को राजस्थान के कोटा में ठेला लगाकर चाट बेचने वाले उसके पिता को 300 रुपये का यूपीआई भुगतान मिला, लेकिन रकम खाते में दिखाई नहीं दी। इसी भुगतान को वापस लेने की कोशिश में परिवार को 1.05 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
राशि खाते में न आने पर पिता ने बेटे को जानकारी दी। इसके बाद परमाल ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर भुगतान वापस लेने का तरीका खोजा और इंटरनेट से एक कस्टमर केयर नंबर निकाला। जिस नंबर पर उसने कॉल किया, वह असली नहीं बल्कि ठगों का था। कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को यूपीआई सेवा का प्रतिनिधि बताते हुए पांच मिनट में समस्या हल करने का भरोसा दिलाया।
ग्वालियर के छात्र और पिता बने शिकार
ठगों ने छात्र से एक मोबाइल एप डाउनलोड कराया और कुछ बैंक संबंधी जानकारी भरवाई। इसके तुरंत बाद उसके मोबाइल पर खाते से पैसे कटने के मैसेज आने लगे। देखते ही देखते छात्र के खाते से 10 हजार रुपये और उसके पिता के खाते से 95 हजार रुपये निकाल लिए गए। जब तक परिवार को पूरी बात समझ आती, तब तक कुल 1.05 लाख रुपये की ठगी हो चुकी थी।
हेल्पलाइन पर शिकायत
घटना का एहसास होते ही छात्र ने पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। हस्तिनापुर थाना पुलिस ने ई-जीरो एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
सावधानी ही बचाव
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर को कस्टमर केयर समझकर कॉल न करें और बिना सत्यापन के कोई एप डाउनलोड न करें। आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत हेल्पलाइन नंबर से ही संपर्क करें। छोटी राशि की समस्या को हल करने की जल्दबाजी कई बार बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
