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जबलपुर के कछार गांव में भालुओं का आतंक, ग्रामीणों ने खेत जाना छोड़ा; वन विभाग से रेस्क्यू की मांग

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Published On: 25 February 2026

जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों की आवाजाही ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेंदुए की दहशत के बीच अब भालुओं की मौजूदगी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर बेलखेड़ा शहपुरा के कछार गांव में दो भालू लगातार देखे जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति ऐसी बन गई है कि उन्होंने खेतों की ओर जाना लगभग बंद कर दिया है।

गांव के बाहर सोमवार को पहली बार भालू देखे जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को भी ग्रामीणों ने उन्हें आसपास घूमते हुए देखा। लगातार तीन दिन तक जंगली जानवरों की मौजूदगी से गांव में भय का माहौल बना हुआ है। शाम होते ही लोग घरों में सिमट जा रहे हैं और बच्चों को बाहर न निकलने की हिदायत दी जा रही है।

जबलपुर में भालुओं का आतंक

कछार गांव के अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं। लेकिन भालुओं के डर से किसान खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो फसल की देखभाल प्रभावित होगी। कुछ किसानों ने बताया कि सुबह-सुबह खेतों में ताजा पदचिह्न भी दिखाई दिए हैं, जिससे आशंका और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते भालुओं का रेस्क्यू नहीं किया गया तो कोई बड़ी घटना हो सकती है। पहले से ही क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की खबरें आती रही हैं, ऐसे में भालुओं का डेरा डालना खतरे को दोगुना कर रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टीम को अलर्ट कर दिया गया है और इलाके की निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों से भी सतर्क रहने और समूह में ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

सतर्कता ही फिलहाल उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिमटने और भोजन की तलाश में जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई और वन विभाग की रणनीति पर ग्रामीणों की नजर टिकी है। लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो, ताकि वे बिना डर के अपने रोजमर्रा के काम कर सकें।

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