भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड परिसर से 899.08 मीट्रिक टन जहरीले कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने संतोष व्यक्त किया है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि कचरे को हटाने और उसके सुरक्षित निपटान की प्रक्रिया का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
कोर्ट ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि अब तक की कार्रवाई संतोषजनक है, लेकिन आगे की कार्ययोजना स्पष्ट रूप से प्रस्तुत की जानी चाहिए ताकि परिसर से जुड़े सभी संभावित खतरों का स्थायी समाधान हो सके।
यूनियन कार्बाइड परिसर
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि यह पूरा कार्य दिसंबर 2024-25 में जारी गाइडलाइंस के अनुसार किया गया। जहरीले कचरे को निर्धारित मानकों का पालन करते हुए पीथमपुर स्थित अधिकृत स्थल पर वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कोर्ट को आश्वस्त किया कि कचरे के परिवहन से लेकर उसके अंतिम निपटान तक पर्यावरण सुरक्षा के सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। इस दौरान सुरक्षा और निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि आसपास के क्षेत्रों में किसी प्रकार का दुष्प्रभाव न पड़े।
मांगा गया मास्टर प्लान
हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कचरे के निष्पादन के बाद भी परिसर में मौजूद शेष ढांचे और अवशेषों को लेकर ठोस योजना जरूरी है। खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या परिसर को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा या उसे सुरक्षित संरचना के रूप में विकसित किया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले एक विस्तृत मास्टर प्लान पेश किया जाए, जिसमें यह बताया जाए कि शेष निर्माण, संरचनाएं और संभावित प्रदूषण स्रोतों से किस प्रकार निपटा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित की गई है।
2004 की जनहित याचिका से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2004 में दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें यूनियन कार्बाइड परिसर में पड़े जहरीले कचरे के निपटान को लेकर चिंता जताई गई थी। लंबे समय से यह मुद्दा पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर माना जाता रहा है। हाई कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि परिसर से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का चरणबद्ध समाधान जल्द सामने आएगा।
