उज्जैन में प्रस्तावित 7 हजार करोड़ रुपये के दो ग्रीन फील्ड रोड प्रोजेक्ट – उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा – के विरोध में बुधवार को तीन जिलों के किसान बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं। 90 प्रभावित गांवों के ग्रामीण 180 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ उज्जैन कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचेगे। किसान अपने साथ राशन और बिस्तर भी ला रहे हैं और मांगों को पूरा किए बिना अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का मन बना चुके हैं।
किसानों का मुख्य विरोध सड़क के ‘एक्सिस कंट्रोल’ प्लान को लेकर है। इस योजना के तहत सड़क जमीन से 15-20 फीट ऊंचाई पर बनेगी, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी प्रभावित होगी। किसानों का तर्क है कि जिस सड़क पर स्थानीय लोग अपने वाहन नहीं चला पाएंगे, उस मार्ग के लिए जमीन क्यों दी जाए। यह पहला मौका है जब दोनों प्रोजेक्ट के प्रभावित किसान एक साथ प्रदर्शन के लिए मैदान में उतरे हैं।
दो प्रमुख मांगें
किसान नेता राजेश सोलंकी ने बताया कि उनकी दो स्पष्ट मांगें हैं। पहली, ग्रीन फील्ड रोड को सामान्य हाईवे की तरह धरातल पर बनाया जाए ताकि ग्रामीणों को सड़क का पूरा लाभ मिले। दूसरी, अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजा वर्तमान बाजार दर के अनुसार दिया जाए। उज्जैन के 56, इंदौर के 20 और रतलाम के 13 गांव इस प्रोजेक्ट से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
डेढ़ साल से आंदोलनरत किसान
किसानों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से मुआवजा और सड़क के एक्सिस कंट्रोल प्लान को लेकर प्रशासन से आश्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण अब किसान राशन और पानी लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में ही रुकने की योजना बना चुके हैं। उनका दावा है कि धरातल पर सड़क बनाना और उचित मुआवजा देना ही समाधान है।
प्रशासन के साथ वार्ता पर नजर
प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए किसान नेताओं से बातचीत की संभावना जताई है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। दोनों ग्रीन फील्ड रोड प्रोजेक्ट से कुल 89 गांव प्रभावित हैं और स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रही है।
