राजधानी भोपाल के प्रमुख शासकीय कार्यालयों वल्लभ भवन, सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर सख्ती शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने मंगलवार सुबह 10 बजे से ही औचक निरीक्षण की कार्रवाई शुरू कर दी। विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न शाखाओं में जाकर उपस्थिति रजिस्टरों की जांच की और समय पर पहुंचने की स्थिति का आकलन किया।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों-कर्मचारियों की आवाजाही पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष निगरानी रखी जा रही है। किस कर्मचारी ने कब कार्यालय में प्रवेश किया और कब बाहर गया, इसकी जानकारी दर्ज की जा रही है। वहीं उपस्थिति से जुड़ा संपूर्ण डेटा सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संकलित किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों को भी अपने-अपने विभागों में इसी तरह की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल के शासकीय दफ्तरों में सख्ती
बताया गया है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन फिलहाल भोपाल से बाहर आधिकारिक दौरे पर हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। तीनों भवनों में विभागीय टीमें तैनात कर दी गई हैं, जो नियमित रूप से उपस्थिति और समय पालन की स्थिति पर नजर रख रही हैं।
समय पालन को लेकर स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं और आम जनता से जुड़े कार्यों में देरी या ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी भी कर्मचारी की अनधिकृत अनुपस्थिति या समय पालन में कोताही पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था का सीधा लाभ जनता को मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से उपस्थिति और कार्यसंस्कृति में सुधार पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस सख्ती का असर अन्य शासकीय कार्यालयों में भी देखने को मिल सकता है।
