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यूको बैंक 10.65 करोड़ घोटाला: CBI की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, कोर्ट ने दोबारा जांच के दिए आदेश

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Published On: 26 February 2026

भोपाल की विशेष अदालत ने 10.65 करोड़ रुपए के यूको बैंक घोटाले मामले में बड़ा आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) नीलम शुक्ला ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की दोबारा जांच कर विस्तृत सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से केस ने नया मोड़ ले लिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरवी रखे गए सामान का सही आकलन किया जाना जरूरी है। इसके लिए स्टॉक रजिस्टर, वेयरहाउस रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और उस समय की बाजार कीमतों को आधार बनाया जाए। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब गोदाम में पर्याप्त माल मौजूद था और उसकी कीमत बैंक के बकाया से अधिक बताई गई, तो फिर उस माल को बेचकर वसूली क्यों नहीं की गई।

यूको बैंक 10.65 करोड़ घोटाला

अदालत ने केस डायरी में मौजूद तथ्यों और बैंक को हुए नुकसान के आंकड़ों में विरोधाभास पाया। रिकॉर्ड के अनुसार गोदाम में पर्याप्त स्टॉक मौजूद था, जिसकी अनुमानित कीमत बकाया रकम से ज्यादा बताई गई थी। ऐसे में बैंक को 10.65 करोड़ रुपए का नुकसान कैसे हुआ, इस पर स्पष्टता नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि माल की वास्तविक स्थिति, कमी और बैंक के नुकसान के बीच के अंतर को स्पष्ट किया जाए।

यह है पूरा मामला?

मामला यूको बैंक से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक के तत्कालीन चीफ मैनेजर आरके सिन्हा सहित अन्य आरोपियों श्रीनिवास शर्मा, राघवेंद्र शर्मा, अंजुला शर्मा और सरिता शर्मा ने मिलकर एमएस देवी राम कोल्ड स्टोरेज में रखे गिरवी माल के आधार पर लिए गए लोन में अनियमितताएं कीं। जांच में सामने आया था कि गिरवी रखे गए माल में कमी या कथित गबन के कारण बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई दोबारा जांच कर यह बताए कि गिरवी रखा गया माल वास्तव में कितना था और क्या वह बकाया रकम की वसूली के लिए पर्याप्त था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि उपलब्ध स्टॉक के बावजूद वसूली की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए जल्द से जल्द सप्लीमेंट्री रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। इस आदेश के बाद अब निगाहें सीबीआई की अगली कार्रवाई और संशोधित जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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